- हिसार-जींद हाईवे वाया राखी गढ़ी लिंक रुट-4 के निर्माण तथा डाटा-लोहारी सड़क मार्ग की मुरम्मत को लेकर सरकार को दी जाएगी अंतिम चेतावन
- हिसार-जींद-राखीगढ़ी लिंक रोड में देरी का जिम्मेदार कौन?
- 33 करोड़ 68 लाख की स्वीकृत परियोजना शुरू क्यों नहीं हुई?
- 10 साल से क्यों नहीं हुई डाटा-लोहारी राघो सड़क की मरम्मत या कोई डकार गया मुरम्मत का पैसा ?
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
नारनौंद। हांसी विधायक विनोद भयाना के पैतृक गांव लोहारी राघो के लोगों को अब सड़क और विकास परियोजनाओं के लिए धरना देने पर मजबूर होना पड़ रहा है। एक तरफ डाटा-लोहारी राघो सड़क पिछले लगभग 10 वर्षों से मरम्मत की बाट जोह रही है, वहीं दूसरी तरफ 33 करोड़ 68 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त बहुप्रतीक्षित मसूदपुर-लोहारी राघो मंडी-राखीगढ़ी लिंक रोड परियोजना वर्षों बाद भी जमीन पर नहीं उतर सकी। अब ग्रामीण पूछ रहे हैं आखिर जर्जर हो चुके डाटा रोड़ की मरम्मत का पैसा कहां गया? हिसार-जींद हाईवे परियोजना में रोड़ा कौन अटका रहा है? इन्हीं सवालों का जवाब मांगने के लिए अब क्षेत्र के किसानों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का एलान कर दिया है। इसी कड़ी में 21 जून 2026 को सुबह 10 बजे डाटा चौक, लोहारी राघो में विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। सर्वजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी सदस्य नन्द किशोर चावला ने कहा कि सरकार को इन दोनों मांगों के संबंध में अनेक बार ज्ञापन, पत्र और मौखिक आग्रह दिए जा चुके हैं, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब क्षेत्र की जनता में भारी रोष है और सरकार को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। 33 करोड़ 68 लाख की स्वीकृति के बावजूद सड़क निर्माण शुरू नहीं धरने के आयोजकों का कहना है कि मसूदपुर-लोहारी राघो मंडी-राखीगढ़ी सड़क मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग-4 से जोड़ने की घोषणा 7 मई 2016 को की गई थी। इसके बाद सरकार द्वारा 33 करोड़ 68 लाख रुपये की तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान की गई। इतना ही नहीं, 16 अक्टूबर 2025 को भूमि संबंधी प्रक्रिया भी ई-भूमि पोर्टल पर दर्ज हो चुकी है, फिर भी आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने वर्षों बाद भी परियोजना का धरातल पर न उतरना गंभीर प्रशासनिक विफलता को दशार्ता है।
आखिर कहाँ गए हाईवे के लिए स्वीकृत 33.68 करोड़
नंद किशोर चावला ने कहा कि धरने में सरकार से यह सवाल पूछा जाएगा कि जब परियोजना स्वीकृत है और बजट भी स्वीकृत किया जा चुका है, तो आखिर निर्माण कार्य किसके इशारे पर रोका गया है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के लिए स्वीकृत 33 करोड़ 68 लाख रुपये के उपयोग की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही या धन के दुरुपयोग के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित विभाग के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और सड़क निर्माण शीघ्र शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन को पूरे हिसार, जींद और आसपास के क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाएगा।
राखीगढ़ी को जोड़ने वाली सड़क विकास की जीवनरेखा
ग्रामीणों का कहना है कि विश्व प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी को हिसार और जींद से सीधा जोड़ने वाली यह सड़क क्षेत्र के विकास की जीवनरेखा साबित होगी। सड़क बनने से हजारों लोगों की आवाजाही आसान होगी, यात्रा दूरी और समय कम होगा, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा तथा पर्यटन को नई गति मिलेगी। धरना मंच से सरकार को यह संदेश दिया जाएगा कि राखीगढ़ी जैसे विश्वस्तरीय धरोहर स्थल को आज भी बेहतर सड़क संपर्क से वंचित रखना क्षेत्र के साथ अन्याय है। डाटा-लोहारी राघो सड़क की बदहाली पर भी फूटा गुस्सा धरने की दूसरी प्रमुख मांग लोहारी राघो से डाटा गांव तक सड़क मार्ग की तत्काल मरम्मत है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले लगभग 10 वर्षों से सड़क की मरम्मत नहीं हुई, जिसके कारण सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, किसानों, विद्यार्थियों और आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार तुरंत इस सड़क की मरम्मत कराए और लोगों को राहत दे।
नंद शिोर चावला ने क्षेत्र के किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, युवाओं और महिलाओं से 21 जून को धरने में बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है। उनका कहना है कि यह केवल सड़क का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के सम्मान, विकास और अधिकारों की लड़ाई है। चावला ने कहा कि यदि सरकार ने दोनों मांगों को तत्काल स्वीकार नहीं किया, सड़क निर्माण और मरम्मत का कार्य शुरू नहीं किया तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा, अब जनता इंतजार नहीं करेगी। 21 जून का धरना सरकार को अंतिम चेतावनी होगा। यदि इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
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