17वीं शताब्दी में यही टोपी पहनते थे लोहारी राघो के सूफी फकीर बाबा बख्शू शाह, पढें इस टोपी की दिलचस्प कहानी व देखें वीडियो
वर्ष 1807 में बाबा बख्शू शाह के चोला छोड़ने (देह त्यागने) के उपरांत आज तक भी परिजनों ने सहेजकर रखी है यह कैप बाब…
Welcome to Harappa Village Lohari Ragho : इतिहास की मिट्टी से लेकर विकास, संस्कृति और एकता का संगम। देखें गाँव लोहरी राघो की आधिकारिक वेबसाइट — खबरें, विकास और हमारी पहचान अब एक ही मंच पर
वर्ष 1807 में बाबा बख्शू शाह के चोला छोड़ने (देह त्यागने) के उपरांत आज तक भी परिजनों ने सहेजकर रखी है यह कैप बाब…
300 साल पहले पीर बाबा बख्शू शाह की तपस्थली रहा है लोहारी राघो History of Peer Baba Bakshu Shah Lohari Ragho Sufi F…
"मैं संदीप कंबोज, लोहारी राघो की मिट्टी का एक छोटा सा अंश हूँ। मेरा उद्देश्य पत्रकारिता और ब्लॉगिंग के माध्यम से हरियाणा की समृद्ध विरासत, विशेषकर हड़प्पा कालीन इतिहास को जीवंत रखना है। मेरा मानना है कि हमारी जड़ें जितनी गहरी होंगी, भविष्य का वृक्ष उतना ही विशाल होगा। इस वेबसाइट के माध्यम से मैं आपको अपने गाँव लोहारी राघो के इतिहास, संस्कृति और आधुनिक बदलावों की यात्रा पर ले जाना चाहता हूँ।"
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