- 9.33 करोड़ के प्रोजेक्ट पर अब उठ रहे भ्रष्टाचार के सवाल
- तीन साल पहले ही किसानों ने माइनर निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल किए जाने के लगाए थे आरोप
- प्रशासन द्वारा चेतावनी को नजरअंदाज करने की कीमत अब किसानों ने चुकाई
- रविवार तड़के 4 बजे टूटी मसूदपुर माइनर, पकी हुई गेहूं की 60-70 एकड़ फसल जलमग्न
- किसानों का आरोप 2022 में ही चेताया था, फिर भी नहीं जागा प्रशासन
- दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
नारनौंद। जिला हांसी के नारनौंद क्षेत्र के गांव लोहारी राघो में मसूदपुर माइनर में आई दरार ने न केवल भ्रष्ट सिस्टम को उजागर कर डाला बल्कि तीन साल पूर्व इसके निर्माण के समय ठेकेदार द्वारा किए गए घोटाले की परतें भी उधेड़ डाली। भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण ने मिलकर गाँव लोहारी राघो के किसानों की लगभग 70 एकड़ गेहूं की पकी फसल को भ्रष्ट व्यवस्था की भेंट चढ़ा डाला। 70 एकड़ पकी फसल डूबने से गाँव के लगभग आधा दर्जन किसान बर्बाद हो गए। भले ही विभाग के अधिकारी इस हादसे की वजह पानी ओवरफ़लो होना बता रहे हों लेकिन तीन साल पूर्व किसानों द्वारा दी गई चेतावनी को वे नजरअंदाज कर रहे हैं। रविवार तड़के जब अचानक माइनर टूट गई तो देखते ही देखते 60 से 70 एकड़ में खड़ी पकी हुई गेहूं की फसल पानी में डूब गई। किसानों के चेहरे पर लाचारी साफ दिखाई दे रही थी। महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गई।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामीणों ने तीन साल पहले ही इस माइनर के निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल होने की आशंका जताई थी। लेकिन उस समय प्रशासन ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।आज जब माइनर टूट गई और किसानों की फसल तबाह हो गई, तब सवाल उठ रहा है क्या यह सिर्फ हादसा है या 9 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार की कहानी? लोहारी राघो में टूटी मसूदपुर माइनर सिर्फ एक नहर टूटने की घटना भर नहीं है। माइनर में आई इस दरार ने सिस्टम की लापरवाही, भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी को भी उजागर कर दिया है।आज किसानों की मेहनत पानी में बह गई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी है क्या सरकार इस मामले में दोषियों को सजा देगी या फिर 9 करोड़ का यह प्रोजेक्ट भी भ्रष्टाचार की फाइल बनकर रह जाएगा? क्योंकि इस बार सवाल सिर्फ एक माइनर का नहीं है। सवाल किसानों की मेहनत, उनके अधिकार और सिस्टम की ईमानदारी का है।
जानकारी के अनुसार रविवार सुबह करीब 4 बजे मसूदपुर माइनर अचानक टूट गई। यह घटना गांव लोहारी राघो में अनाज मंडी से आगे रामफल जांगड़ा के मकान के पास हुई।सुबह जब किसान सुरेंद्र अपने खेत पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि माइनर का एक बड़ा हिस्सा टूट चुका है और तेज बहाव के साथ पानी खेतों की तरफ फैल रहा है। उन्होंने तुरंत फोन करके आसपास के किसानों को सूचना दी। कुछ ही देर में दर्जनों किसान मौके पर पहुंच गए। लेकिन तब तक पानी खेतों में फैल चुका था और पकी हुई गेहूं की फसल जलमग्न हो चुकी थी। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते माइनर की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।

किसानों की आंखों के सामने डूबी मेहनत
माइनर टूटने से गांव के कई किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। जिन किसानों को नुकसान हुआ उनमें मुख्य रूप से पृथ्वी चावला, राजबीर पूनियां, नन्हा पूनियां, रमेश रामगढिया और सुरेंद्र शामिल हैं।इन किसानों के खेतों में पकी हुई गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन अचानक आए पानी ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। किसानों का कहना है कि आज के समय में खेती पहले ही घाटे का सौदा बनती जा रही है। ऊपर से इस तरह की घटनाएं किसानों को पूरी तरह तोड़ देती हैं।
सिंचाई विभाग मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक हो चुका था नुकसान
घटना की सूचना मिलने के बाद सिंचाई विभाग के जेई प्रमोद कुमारमौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने तुरंत राजथल हेड से पानी की आपूर्ति बंद करवाई। जेसीबी मशीन की मदद से पानी को पास की ड्रेन में मोड़ने की कोशिश की तथा माइनर की मरम्मत का काम शुरू करवाया। फिलहाल मिट्टी डालकर पानी को रोकने की कोशिश की जा रही है। लेकिन किसानों का कहना है कि यह सब तब किया गया जब फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी थी।
यह हैं पीड़ित किसानों की 5 बड़ी मांगें
फसल नुकसान का तुरंत सर्वे
प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा
माइनर निर्माण की उच्च स्तरीय जांच
दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए
जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए
इस मामले का सबसे बड़ा और गंभीर पहलू यह है कि ग्रामीणों ने 2022 में ही माइनर के निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल होने का आरोप लगाया था।ग्रामीणों का कहना है कि उस समय निर्माण कार्य कई बार रात के समय किया जाता था। क्रेशर की जगह मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा था जिसके सबूत ग्रामीणों ने एक वीडियो में दिखाए। किसानों की मानें तो निर्माण के समय गुणवत्ता के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। किसानों ने इस बारे में सिंचाई विभाग के जेई और वरिष्ठ अधिकारियों को सबूतों सहित अवगत करवाया था। लेकिन आरोप है कि राजनीतिक दबाव और ठेकेदार के प्रभाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई।
किसानों के अनुसार उस समय निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल के वीडियो भी वायरल हुए थे। इन वीडियो में कथित तौर पर दिखाया गया था कि माइनर के निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है। आज सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जगह निर्माण में गड़बड़ी के आरोप लगे थे, उसी स्थान के पास थोड़ा सा आगे ही माइनर टूट गई। इससे किसानों के आरोप और भी मजबूत हो गए हैं।
मसूदपुर माइनर के निर्माण के लिए सिंचाई विभाग ने कुल 9 करोड़ 33 लाख रुपये का बजट मंजूर किया था जिसमें से 2 करोड़ 39 लाख रुपये जमीन खरीदने के लिए थे जबकि बाकी राशि निर्माण कार्य के लिए खर्च की जानी थी। इस परियोजना का निर्माण कार्य दिसंबर 2021 में शुरू हुआ और जून 2023 तक चला। अब सवाल उठ रहा है कि जब इतना बड़ा बजट खर्च किया गया, तो फिर माइनर इतनी जल्दी कैसे टूट गई?
पहले भी कई बार टूट चुकी है माइनर
किसानों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब मसूदपुर माइनर टूटी हो। ग्रामीणों के अनुसार यह माइनर पहले भी कई बार टूट चुकी है पिछले सप्ताह भी **डाटा गांव की तरफ माइनर टूट गई थी। इससे साफ है कि समस्या सिर्फ एक जगह की नहीं बल्कि पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस प्रोजेक्ट के एग्रीगेटर रहे सतीश चावला पटवारी ने भी सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि जब माइनर का निर्माण हो रहा था, तब उन्होंने इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने इस संबंध में आरटीआई भी लगाई थी। साथ ही सीएम विंडो पर भी शिकायत दर्ज करवाई थी। उनका बड़ा आरोप है कि उस समय सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उन्हें रिश्वत देकर चुप रहने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन उन्होंने रिश्वत लेने से इनकार कर दिया और कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
राजनीतिक संरक्षण के कारण दब गई शिकायत?
सतीश चावला का कहना है कि ठेकेदार की राजनीतिक पहुंच के कारण न ठेकेदार पर कार्रवाई हुई न ही विभागीय अधिकारियों पर। अब जब माइनर टूट गई और किसानों का नुकसान हुआ है, तब उन्होंने दोबारा पूरे प्रोजेक्ट की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
किसान बोले दोषियों पर कार्रवाई करें वरना छेड़ेंगे आंदोलन
रविवार को हुई माईनर टूटने की घटना के बाद किसानों में भारी गुस्सा देखा गया। किसान राजबीर पूनिया, काला चावला व अन्य का कहना है कि अगर समय रहते उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता, तो आज उनकी मेहनत बर्बाद नहीं होती। वहीं सर्वजन समाज पार्टी के अध्यक्ष नंद किशोर चावला ने भी माईनर निर्माण में धांधली के आरोप लगाते हुए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को आड़े हाथ लिया है। चावला का कहना है कि जिला प्रशासन इस माईनर निर्माण की बारिकी व ईमानदारी से जांच करवाए तथा दोषी ठेकेदार व भ्रष्टाचारी अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाईकरे नहीं तो उनकी पार्टी किसानों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन छेड़ने को मजबूर होगी।
अब पूरा क्षेत्र यह सवाल पूछ रहा है कि क्या अब ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा ? क्या अब दोषी अधिकारियों को सस्पेंड किया जाएगा? क्या माईनर निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की जांच होगी? या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की खबर बनकर दब जाएगा?
जानें क्या कहते हैं अधिकारी
मसूदपुर माइनर में आई दरार के संबंध में जब सिंचाई विभाग के तत्कालीन एसडीओ संदीप से बात की गई तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि माइनर में दरार पानी ओवरफ़लो होने की वजह से आई है न कि इसमें घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों के आरोप निराधार हैं। जब वर्ष 2022 में निर्माण कार्य चल रहा था तो निर्माण कार्य में घटिया सामग्री इस्तेमाल की जो शिकायत आई थी, उस पर तुरंत प्रभाव से एक्शन लेते हुए ठेकेदार को निर्देश देकर विवादित जगह पर दोबारा से निर्माण करवा दिया गया था। वहीं जेई प्रमोद के मुताबिक हादसा माइनर में पानी ओवरफ्लो होने की वजह से हुआ है। हमने मौके पर जाकर माइनर का पानी पीछे से रुकवा दिया है।
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