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संदीप कंबोज
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Welcome to Harappa Village लोहारी राघो इतिहास की मिट्टी से लेकर विकास, संस्कृति और एकता का संगम खबरें, विकास और हमारी पहचान अब एक ही मंच पर जो छुपाया जा रहा है वही हम दिखाएंगे हम किसी पार्टी या नेता के गुलाम नहीं हम सिर्फ सत्य और संविधान के साथ

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Welcome to Harappa Village Lohari Ragho : इतिहास की मिट्टी से लेकर विकास, संस्कृति और एकता का संगम। देखें गाँव लोहरी राघो की आधिकारिक वेबसाइट — खबरें, विकास और हमारी पहचान अब एक ही मंच पर

खबरदार लोहारी राघो ! 20 साल से कौन खराब करता आ रहा है गाँव का माहौल ? आज हर ग्रामीण जरुर जान ले यह पूरा सच ?

 लोहारी राघो का हर नौजवान-युवा, बच्चा, बुजुर्ग आज मांगाराम कम्बोज की यह कहानी जरुर पढ़े


  • क्या लोहारी राघो के लोगों का बिल्कुल मर चुका है जमीर या नेताओं के गुर्गे और असामाजिक तत्व खराब कर रहे पूरे गाँव का सिस्टम !
  • क्या ग्राम पंचायत को राधा स्वामी कमेटी पर नहीं दर्ज करवानी चाहिए एफआईआर
  • क्या मांगाराम से लिए गए 5.60 लाख रुपए पंचायती फंड में जमा नहीं होने चाहिए थे
  • आखिर किस हक से उन्होंने पंचायती जमीन को बेचा और कीमत खुद डकार गए

Beware Lohari Ragho!  Who has been spoiling the environment of the village for 20 years

संदीप कम्बोज

हिसार। जिला हांसी की तहसील नारनौंद का गाँव लोहारी राघो। कहानी शुरु होती है वर्ष 2006 से। एक ग्रामीण मांगाराम कम्बोज पुत्र सोना राम कम्बोज गाँव के बस स्टैंड पर पंचायती जमीन पर कब्जा कर बनाए गए राधास्वामी सत्संग घर की जमीन का सौदा कर लेते हैं। 5 लाख 60 हजार रुपए देकर जमीन का कब्जा ले लिया जाता है। पंचायती जमीन पर कब्जा देने वाली राधा स्वामी कमेटी में कुछ नेताओं के दलाल गुर्गे भी हैं। अब यह 5 लाख 60 हजार रुपया कहाँ गया किसी को पता नहीं। ना ही तो ग्राम पंचायत लोहारी राघो को इन पैसों से कोई लेना-देना है और न ही पूरे गाँव से एक भी ग्रामीण को इन पैसों का हिसाब मांगने की हिम्मत है। क्योंकि इस पैसे को संस्था में जमा करवाने की कोई रसीद आज तक नहीं दिखाई गई है। अब यह पैसा हजम करने वाले नेताओं के यही गुर्गे अपने आका नेताओं के आशाीर्वाद से मांगा राम कम्बोज को टोर्चर करने लगते हैं कि या तो यह जमीन हमें दे दो नहीं तो हम तुम्हारा जीना हराम कर देंगे। अलग-अलग जातियों के इन गुर्गों में से कोई गुर्गा इस जमीन पर अपनी जाति के नाम से भवन, धर्मशाला बनाने की बात करता है तो कोई गुर्गा अपनी जाति के नाम से पुस्तकालय, धर्मशाला या शोपिंग कोम्पलैक्स बनाने की। ध्यान रहे ये सब वही गुर्गे हैं जो मांगा राम से पैसे लेकर हजम कर चुके हैं। अब मांगाराम यह कहकर इनकार कर देते हंै कि मैं यह जमीन क्यों दूं मैंने तो यह जमीन अपनी खून-पसीने की कमाई से खरीदी है। मैं तो इतने पैसों से आज के रेट मुताबिक तीन एकड़ जमीन खरीद सकता हूँ। लेकिन ये गुर्गे और गाँव के कुछ असामाजिक शरारती तत्व ग्राम पंचायत के तत्कालीन सरपंच पति सुरेश सैनी के पास जाते हैं कि या तो मांगाराम से जमीन खाली करवाओ, नहीं तो हम तुम्हें फंसा देंगे कि तुमने पंचायती जमीन पर अवैध कब्जा करवा दिया। यहां ध्यान देने योग्य सबसे बड़ा प्वार्इंट यह है कि इन गुर्गों और असामाजिक तत्वों को गाँव की अन्य पंचायती जमीन, जोहड़ों, कब्रिस्तान, कृषि भूमि पर अवैध कब्जे कर बैठे 700 कब्जाधारकों से कोई मतलब नहीं है। इन्हें तो सिर्फ मांगाराम की जमीन पर शोपिंग कॉम्पलैक्स बनाना है। ये सभी गुर्गे मिलकर मांगाराम को यह तक ओफर देते हैं कि मांगाराम, हमें तेरी जमीन में आगे-आगे से रोड़ की साईड एक-एक दुकान का हिस्सा दे दो ताकि हम सब अपनी दुकानें यहां बना लें। फिर हम तुझे कुछ नहीं कहेंगे। अगर यहां चैन से रहना है तो हमारी बात मान लो, वरना हम नेताओं के गुर्गे हैं। हमारे ऊपर नेताओं का आशीर्वाद है। तुम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे, और हम जो चाहे तुम्हारा बिगाड़ देंगे क्योंकि हमारे पास राजनीतिक पॉवर है। सारे प्रशासनिक अफसर हमारे नेताओं की जेब में पड़े हैं। कहानी में ट्वीस्ट यहीं आता है। नेताओं के गुर्गे, गाँव के कुछ शरारती-असामाजिक तत्व, तत्कालीन सरपंच पति और सरपंच से मिलकर कोर्ट में सीधा केस कर देते हैं सिर्फ अकेले मांगाराम कम्बोज के खिलाफ। यहां ध्यान देने वाली बात है कि इसके लिए कोई निशानदेही नहीं करवाई जाती। सरपंच पति और इन बाकि शरारती असामाजिक तत्वों व नेताओं के गुर्गों को 700 अन्य अवैध कब्जाधारक क्यों दिखाई नहीं दिए? अब आप समझ सकते हैं कि सिर्फ एक कब्जाधारक को क्यों टारगेट किया गया। ये सब के सब जो भी इस षडयंत्र को रचने वाले हैं, सभी मांगाराम से रोड की साईड एक-एक दुकान मांग रहे थे। की हमें एक-एक दुकान बनाने दो आपको कुछ नहीं कहेंगे। पुख्ता सूत्रों से पता चला है कि इन शरारती-असामाजिक तत्वों ने रात को इस जमीन में घुसकर कई बार यहां की पैमाईश भी कि और अपने-अपने हिस्से फिक्स कर लिए थे कि ये वाला हिस्सा मेरा और ये वाला तेरा। अब ग्राम पंचायत द्वारा 2008 में मांगाराम पर केस दर्ज कर दिया जाता है जो आज तक चल रहा है। अब कहानी में नया मोड़ उस समय आता है जब सरपंच चंद्रकांता चांदना के कार्यकाल में वर्ष 2019 में ग्राम पंचायत मांगाराम कम्बोज के खिलाफ एक और केस दर्ज करवा देती है। अब सरपंच चंद्रकांता को भी पूरे गाँव के 700 अन्य अवैध कब्जाधारक दिखाई नहीं देते सिवाए मांगाराम कम्बोज के अवैध कब्जे के। यदि यह दोनों सरपंच इतने इमानदार थे तो इन्होंने पूरे गाँव की निशानदेही क्यों नहीं करवाई और सभी के खिलाफ मुकदमे दर्ज क्यों नहीं करवाए। इन दोनों के केसों के चक्कर में मांगाराम आज तक लाखों रुपए कोर्ट कचहरी में बर्बाद करते आ रहे हैं। और पूरे गाँव के 700 अवैध कब्जाधारक मजे से रह रहे हैं। अब आप अच्छी तरह से समझ गए होंगे कि मांगाराम के साथ यह षडयंत्र क्यों और किन शरारती तत्वों द्वारा रचा गया।

2024 : जब भरी पंचायत में मांगाराम को किया गया जलील, झोली फैलाकर माफी मांग रोने लगे मांगाराम
अब आते हैं फरवरी 2024 में। पंजाबी धर्मशाला में पंचायत बुलाई जाती है। यहां वही असमाजिक तत्व, नेताओं के गुर्गे ओर अलग-अलग जातियों के स्वंयघोषित ठेकेदार जो अपने आप को गाँव का चौधरी समझते हैं जिन्हें पंचायत के ‘पी’ का भी मतलब नहीं पता, वे अकेले मांगाराम कम्बोज को ही कटघरे में खड़ा करके उन्हें बुरी तरह से जलील करते हैं। इन गुर्गों द्वारा मांगाराम को इतना जलील और प्रताड़ित किया जाता है कि मांगाराम कम्बोज भरी पंचायत में झोली फैलाकर माफी मांगते हैं और रोने लगते हैं। कहते हैं गाम राम होता है। और गाँव के सामने मांगाराम झोली फैलाकर कहते हैं कि मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मैंने पैसे देकर यह जमीन खरीदी है। अब पूरे गाँव से कहना चाहता हूँ कि यह जगह मेरी झोली में डाल दो। लेकिन इन शरारती-असमाजिक तत्वों और नेताओं के गुर्गों को बिल्कुल भी दया नहीं आती और ये सीधा धमकी देते हैं, मांगाराम तूं तो खावै गुलगले अर तन्नै माफ कर दयां। इस घटिया नीच बकवास करने वालों से मैं पूछना चाहता हूँ जब पूरा गाँव यानि 700 अवैध कब्जाधारक वही गुलगुले खा रहा है जो मांगाराम खा रहे हैं तो ऐसी घटिया बक्वास बाकियों के लिए क्यों नहीं की गई। इस पंचायत में आने वाले उन सभी चौधरियों को शर्म आनी चाहिए जो ऐसी घटिया बकवास कर और चुपचाप सुन रहे थे। क्या इन चौधरियों ने बाकि 700 अवैध कब्जाधारको पर भी कार्रवाई की मांग उठाई। आखिर ये इतने इमानदार थे तो कहते कि मांगाराम के साथ-साथ बाकि कब्जाधारकों को भी गुलगले नहीं खाने दिए जाएंगे। या इन्हें सिर्फ मांगाराम से ही परेशानी है।

पंचायत में जलील किए जाने के बाद मांगाराम ने करवाई पूरे गाँव की निशानदेही
इस पंचायत में पंचायतियों की घटिया सोच सामने आने के बाद परेशान होकर मांगाराम अप्रैल 2024 में पूरे गाँव की पंचायती जमीन, जोहड़ों, फिरनी समेत समस्त शामलाती जमीन पर अवैघ कब्जों की निशानदेही करवाकर कार्रवाई किए जाने की शिकायत कर देते हैं। अब यही नेताओं के गुर्गे, असामाजिक शरारती तत्व इस निशानदेही को रुकवाने के लिए पूरा जोर लगाते हैं लेकिन इन्हें मुंह की खानी पड़ती है। लगभग 10 माह तक ये अपने आका नेताओं के फोन करवाके निशानदेही पर रोक लगवाकर रखते हैं। आखिरकार नेता भी बार-बार अफसरों को फोन करके परेशान हो जाते हैं। मांगाराम की रोज-रोज की सैकड़ों शिकायतों के बाद फरवरी 2025 में प्रशासन को निशानदेही करवानी पड़ती है। अब खेल निशानदेही रिपोर्ट में छेड़छाड़ का चलता है। अब ये पंचायत में दखल रखने वाले असामाजिक तत्त्व और नेताओं के गुर्गे इस रिपोर्ट में खेल खेलते हैं। जानबूझकर रिपोर्ट को लटकाया जाता है। और उसमें अपने मनमुताबिक बनवाया जाता है। इस रिपोर्ट में गाँव के कुछ कब्जाधारक नंबरदारों और पंचों के नाम निकलवा दिए जाते हैं ताकि उनकी पंची और नंबरदारी न चली जाए। यह सब वही नेताओं के गुर्गे और शरारती-असमाजिक कर रहे हैं जो पहले दिन से इस शातिर षडयंत्र को खेल रहे हैं जिन्हें मांगाराम के मकान में रोड की साईड आगे से दुकानें चाहिए। जैसे-तैसे 10 जून 2025 को निशानदेही रिपोर्ट आ जाती है।


अब क्यों नेताओं-विधायकों व मंत्रियों के पीछे भागते फिर रहे ये गुर्गे  

निशानदेही रिपोर्ट में 700 से अधिक अवैध कब्जाधारक गाँव की पंचायती, शामलाती, फिरनी आदि की जमीन पर काबिज पाए जाते हैं। इनमें 10 पंचों के भी नाम हैं जिनमें 4 पंचों के स्वंय के नाम हैं जबकि 6 अन्य पंचों के परिजनों जैसे पिता, भाई, ससुर आदि के नाम दर्ज करवाए हैं जो कि इन्हीं षडयंत्रकारियों की चाल से संभव हो पाया है। जो निशानदेही रिपोर्ट में देरी करवाई जा रही थी, यह सब इन कुछ पंचों और नंबरदारों को बचाने के लिए ही किया जा रहा था। अब सवाल उठता है जब यह सभी मेंबर और नंबरदार आज भी इसी गाँव में अवैध कब्जे की जमीन पर रह रहे हैं और निशनदेही रिपोर्ट में इनके नाम गायब करवा दिए गए हैं तो यह किसके इशारे पर और किन नेताओं के आशाीर्वाद से क्यों किया गया है, आप आसानी से समझ सकते हैं। क्या ये षडयंत्रकारी अब ऐसी ओच्छी राजनीति पर उतर चुके हैं कि अब भी केवल मांगाराम को फंसाना चाहते हैं और बाकि सभी अवैध कब्जाधारकों को बचाना चाहते हैं। पंचों को बचाने के लिए ये शरारती असामाजिक तत्व अब तक कई बार अलग-अलग भाजपा नेताओं, विधायकों, पूर्व व मौजूदा मंत्रियों के पास चक्कर काट चुके हैं ताकि पंचों, नंबरदारों व बाकि अन्य 700 अवैध कब्जाधारकों पर कोई आंच न आए।

अभी बाज नहीं आए गुर्गे, अब सिर्फ दो मस्जिदों की करवा दी निशानदेही
नेताओं के ये नीच गुर्गे व असामाजिक-शरारती तत्व आज भी अपनी इस घटिया सोच से बाज नहीं आ रहे हैं। पहले भी वर्ष 2008 व 2019 में इन्होंने अकेले मांगाराम को टारगेट कर अकेले के खिलाफ पंचायती जमीन कब्जाने का केस कर दिया जबकि 700 अन्य कब्जाधारकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करवाई गई क्योंकि गाँव में ज्यादातर कब्जे ही नेताओं के गुर्गो ने किए हुए हैं या नेताओं ने करवाए हुए हैं। अब 2026 में पिछले सप्ताह वक्फ बोर्ड को शिकायत करके मांगाराम कम्बोज की मस्जिद व इन दल्लों, गुर्गों का पर्दाफाश करते आ रहे पत्रकार संदीप कम्बोज के निवास स्थान वाली मस्जिद की निशानदेही करवा दी गई। आज भी े गुर्गे अपने आका नेताओं वाली सोच के मुताबिक सिर्फ एक-दो कब्जाधारकों को टारगेट करने वाली कार्रवाई करवा रहे हैं। सवाल अब भी वही है। यदि ये इतने ही इमानदार हैं तो पूरे गाँव की वक्फ संपत्तियों की निशानदेही क्यों नहीं करवा देते। लोहारी राघो में आज लगभग 6 एकड़ से अधिक वक्फ संपत्तियों पर ग्रामीणों द्वारा अवैध कब्जे किए गए हैं जिनमें ज्यादातर कब्जाधारक नेताओं के गुर्गे हैं। ये इतने सच का साथ देने वाले या नियम को मानने वाले हैं तो सभी वक्फ कब्जाधारकों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करवाई गई। क्या यह सरासर एक-दो ग्रामीणों से निजी रंजिश रखने का मसला नहीं लग रहा। सीधा सवाल है कि ये एक-दो अवैध कब्जाधारकों को टारगेट कर रहे हैं तो बाकियों से इन्हेंं डर क्यों लग रहा है? क्या इन्होेंने अपने आका नेताओं के ईशारे से गाँव का बंटाधार करने का पूरा मन बना लिया है।

जातिवाद से दूर हटकर इन षडयंत्रकारियों से गाँव को बचाओ
आप अब स्वंय अंदाजा लगा सकते हैं कि आखिर ये पूरा षडयंत्र क्या था? गांव के सभी लोगों से निवेदन है कि इस षडयंत्र में शामिल किसी भी शरारती-असमाजिक तत्व या गुर्गे को आप हल्के में मत लें और यदि कोई इनमें से आपकी जाति का है, परिजन, रिश्तेदार, दोस्त है तो आप इन लोगों से दूरी बना लें क्योंकि जो ऐसी घटिया सोच रखते हैं जिनके अंदर किसी के लिए इतना जहर, नफरत भरा है वे किसी के सगे नहीं हो सकते। ऐसे लोगों को अब बेनकाब करने का वक्त आ गया है। सभी ग्रामीणों से निवेदन है जातिवाद से ऊपर उठकर ऐसी सोच रखने वालों का खुलकर बायकोट करें जो पिछले 20 साल से गाँव का माहौल खराब करवाते आ रहे हैं। और लोहारी राघो में जितने भी गलत-अनैतिक, आपराधिक कृत्य हो रहे हैं, उन सभी में इसी गिरोह की मिलीभगत मिलेगी। यह मैं दावे के साथ कह रहा हूँ।

लोहारी राघो के हर ग्रामीण से सीधा सवाल
1. यदि गाँव में 700 से अधिक लोगों ने पंचायती, फिरनी, जोहड़ों आदि की जमीन पर अवैध कब्जे किए हैं तो ग्राम पंचायत द्वारा वर्ष 2008 में अकेले मांगाराम कम्बोज के खिलाफ केस दर्ज क्यों करवाया गया ?
2. क्या ग्राम पंचायत को पंचायती जमीन बेचने वाली राधा स्वामी कमेटी के पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज नहीं करवानी चाहिए थी एफआईआर?
3. क्या राधा स्वामी कमेटी में नेताओं के गुर्गों का वर्चस्व होने की वजह से उनसे डर गई थी ग्राम पंचायत ?
4. क्या सरपंच चंद्रकांता चांदना को भी दिखाई नहीं दिए गाँव के 700 अवैध कब्जाधारकों के अवैध कब्जे?
5. जब गाँव के 10 पंच आज  भी अवैध कब्जों पर रह रहे हैं तो इन्हें कौन बचा रहा है? क्या इनके खिलाफ नहीं होनी चाहिए निलंबन व कानूनी कार्रवाई ?
6. क्या इलाके के नेताओं का काम अब अपने गुर्गों की बदौलत गाँवों में इस तरह की घटिया व नीच राजनीति करने का रह गया है ?
7. जब भरी पंचायत में मांगाराम कम्बोज ने पूरे गाम राम से माफी मांग ली थी तो इससे ज्यादा और क्या चाहते थे ये नेताओं के गुर्गे ?
8. अब जब मांगाराम गाँव में हर तरह के अवैध कब्जों की निशानदेही करवा रहे हैं तो क्यों बिलबिला रहे हैं, ये शरारती तत्व? अब गुर्गों द्वारा गाँव में मांगाराम के खिलाफ क्यों बनाया जा रहा माहौल ?
9. क्या मांगाराम कम्बोज द्वारा अब करवाई जा रही प्रशासनिक कार्रवाई के लिए यही शरारती-असामामजिक तत्व और नेताओं के गुर्गे नहीं हैं जिम्मेदार? इसमें भला मांगाराम की क्या गलती?
10. एक चुभता सवाल हर ग्रामीण से : क्या मांगाराम गलत है अगर नहीं तो क्यों सिली हुई है सबकी जुबान? क्यों नहीं सिखाया जा रहा 20 साल से गाँव का माहौल खराब करते आ रहे नेताओं के इन गुर्गों व असामाजिक-शरारती तत्वों को सबक ?

एक बात याद रखिए  : आज निशाना मांगाराम है। अगला निशाना आप या आपका परिवार भी हो सकता है। क्योंकि ये जाहिल लोग गाँव के धैर्य की परीक्षा ले रह हैं। मांगाराम पर यह सिर्फ प्रयोग है कि इस गाँव में गलत के खिलाफ कितना बोलने वाले हैं। कितने लोग मांगाराम के साथ खड़े होते
हैं।यदि मांगाराम के साथ आज कोई नहीं है तो यह इन गुर्गों, असमाजिक, शरारती तत्वों की जीत होगी। फिर ये अगले शिकार की तलाश करेंगे वो आपके या हमारे किसी भी घर से हो सकता है। इसलिए अब भी समय है गाँव में माहौल खराब करते आ रहे इन असामाजिक-शरारती तत्वों व नेताओं के गुर्गों के बारे में बच्चे-बच्चे को मांगाराम की यह कहानी बताईए। यकिन मानिए जब हर ग्रामीण को सच पता चलेगा तो इन गुर्गों की बहुत बड़ी हार होगी। और हमारा गांव भवष्यि में इस तरह की घटिया, नीच राजनीति का शिकार होने से बच जाएगा। भविष्य में किसी और मांगाराम को ऐसे प्रताड़ित नहीं कर पाएंगे नेताओं के ये चंद नीच गुर्गे व असामाजिक-शरारती तत्त्व। अब भी समय है जाग जाईए। गाँव का माहौल खराब मत होने दीजिए। अगर गाँव में शांति-भाईचारा कायम रखना है तो इन राजनीतिक गिद्धों को अपनी मंशा में कामयाब कभी मत होने दीजिए।

संदीप कम्बोज
लेखक खबरदार भारत के संपादक हैं


 

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Sandeep Kamboj

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"मैं संदीप कंबोज, लोहारी राघो की मिट्टी का एक छोटा सा अंश हूँ। मेरा उद्देश्य पत्रकारिता और ब्लॉगिंग के माध्यम से हरियाणा की समृद्ध विरासत, विशेषकर हड़प्पा कालीन इतिहास को जीवंत रखना है। मेरा मानना है कि हमारी जड़ें जितनी गहरी होंगी, भविष्य का वृक्ष उतना ही विशाल होगा। इस वेबसाइट के माध्यम से मैं आपको अपने गाँव के इतिहास, संस्कृति और आधुनिक बदलावों की यात्रा पर ले जाना चाहता हूँ।"

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