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संदीप कंबोज
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Welcome to Harappa Village Lohari Ragho : इतिहास की मिट्टी से लेकर विकास, संस्कृति और एकता का संगम। देखें गाँव लोहरी राघो की आधिकारिक वेबसाइट — खबरें, विकास और हमारी पहचान अब एक ही मंच पर

है कोई इस ‘‘धृतराष्ट्र नगरी’’ में सुनने वाला : क्या अब 745 अवैध कब्जाधारियों को कोर्ट घसीट ले जाएगी लोहारी राघो ग्राम पंचायत ?

  • ग्राम पंचायत द्वारा 18 साल पहले इकलौते कब्जाधारक मांगाराम कम्बोज के खिलाफ कोर्ट में दर्ज करवाया गया था केस जो वर्तमान में भी विचाराधीन
  • क्या वर्ष 2008 में ग्राम पंचायत को दिखाई नहीं दिए 745 अन्य अवैध कब्जाधारक, सिर्फ एक कब्जाधारक को क्यों किया गया टारगेट
  • आखिर इसके पीछे चुनावी रंजिश थी, राजनीतिक दबाव या फिर कोई षडयंत्र
  • ग्राम पंचायत द्वारा 18 साल से किए जा रहे मानसिक उत्पीड़न से तंग आ चुका मांगाराम, कोर्ट केस में लाखों रुपए हो चुके खर्च
  • हर समय ग्राम पंचायत द्वारा दी गई टेंशन से बीपी, शुगर समेत कई गंभीर बीमारियों का हो चुका शिकार, कौन है इसका जिम्मेदार
  • क्या गाँव में किसी का नहीं जागा जमीर, किसी भी ग्रामीण को दिखाई नहीं दिया ग्राम पंचायत द्वारा सरेआम किया जा रहा यह अन्याय
  • मांगाराम की शिकायत पर वर्तमान ग्राम पंचायत द्वारा करवाई गई निशानदेही रिपोर्ट में 28 एकड़ पंचायती जमीन पर काबिज पाए गए हैं 746 अवैध कब्जाधारी जिनमें 10 मौजूदा पंच
  • 732 ने पंचायती जमीन पर तो 14 लोगों का पंचायत की कृषि भूमि पर साबित हुआ है अवैध कब्जा
  • कलेक्टर रेट के हिसाब से करीब 26 करोड़ रुपए बताई जा रही है कब्जा की गई 28 एकड़ पंचायती जमीन की कीमत

संदीप कम्बोज
हिसार/नारनौंद। सैकड़ों अपराधी एक ही अपराध को करने वाले हों और उसकी सजा सिर्फ एक को ही सुना दी जाए। सैकड़ों के अपराध को अनदेखा कर सिर्फ एक ही अपराधी पर दोषारोपण कर 18 साल तक लगातार मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न किया जाता रहे और उसी अपराध को करने वाले अन्य सभी अपराधियों को मौज उड़ाने की छूट दे दी जाए और वे तमाम सैकड़ों अपराधी और सारा समाज मूकदर्शक बनकर तमाशा देखता रहे तो क्या इसे जुल्म नहीं कहेंगे ? 
(Will-Lohari-Ragho-Gram-Panchayat-now-drag-745-illegal-occupants-to-court) जी हां ! जुल्म की ऐसी ही इंतहा हुई है जिला हिसार की तहसील नारनौंद अंतर्गत आने वाली ‘‘धृतराष्ट्र नगरी’’ गाँव लोहारी राघो में। ‘‘धृतराष्ट्र नगरी’’ हम इसलिए कह रहे हैं क्योेंकि पिछले 18 साल से जिस गुनाह के लिए एक नागरिक को प्रताड़ित किया जा रहा है, उसी अपराध को करने वाले सैकड़ों अपराधियों के लिए पुरा गाँव, समाज मौन है। सिर्फ एक अपराधी पर जुल्म करने वाला भी कोई और नहीं बल्कि स्वंय ग्राम पंचायत लोहारी राघो है वो भी वर्तमान नहीं पूर्व की पंचायतें जो कि अन्याय का प्रतिबिंब रही और 18 साल से 745 कब्जाधारकों के अपराध पर आंखें मूंद सिर्फ और सिर्फ मात्र एक ही ग्रामीण को प्रताड़ित करती रही। हम बात कर रहे हैं गाँव लोहारी राघो में पूर्व सरपंचों, राजनेताओं व उनके दलालों की शह पर सरेआम पंचायती जमीन पर करवाए गए अवैध कब्जों की। गाँव की फिरनी, तालाबों समेत पंचायती जमीन के दर्जनों एकड़ रकबे पर सरेआम अवैध कब्जे होते रहे और पूर्व सरपंच व प्रशासन चादर तानकर सोते रहे। अब तक के किसी भी सरपंच,ग्राम सचिव, प्रशासनिक अधिकारी या गाँव के मौजिज ग्रामीणों को उस समय ये अवैध कब्जे दिखाई नहीं दिए सिवाय एक ग्रामीण मांगाराम कम्बोज के अवैध कब्जे के। तत्कालीन ग्राम पंचायत ने वर्ष 2008 में मांगाराम कम्बोज को तो कोर्ट में घसीट लिया लेकिन अन्य 745 अवैध कब्जाधारक दिखाई नहीं दिए। हम जुल्म की इंतहा इसलिए कह रहे हैं कि इतने बड़े गाँव में सिर्फ एक ग्रामीण का अवैध क्ब्जा दिखाई दिया बाकि जो 700 से ज्यादा अवैध कब्जाधारक थे, वे क्या ग्राम पंचायत के चहेते थे जो उन्हें कोर्ट नहीं घसीटा गया। एक ही ग्रामीण को टारगेट कर उसके खिलाफ की गई प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई सवालों के घेरे में है। इस भेदभावपूर्ण कार्रवाई के परिणामस्वरुप आज मांगाराम बीपी, शुगर से लेकर कई तरह की गंभीर बीमारियों का शिकार हो चुके हैं। 17 साल से लगातार रोजाना कोर्ट-कचहरी के झमेलों को झेलते लाखों रुपया बर्बाद हो चुका है और आज भी यह सिलसिला जारी है। मांगाराम कम्बोज की शिकायत पर ग्राम पंचायत द्वारा करवाई गई निशानदेही रिपोर्ट में 746 अवैध कब्जाधारकों पर कब्जे साबित हुए हैं जिनमें एक मांगाराम स्वंय हैं। और ये अवैध कब्जे आज के नहीं हैं, 30-40 साल पहले पूर्व की पंचायतों द्वारा अपने चहेतों को रेवड़ियां बांटने के मकसद से करवाए गए हैं और ग्राम पंचायत सिर्फ मांगाराम के खिलाफ कोर्ट जाती है बाकि को आज तक नोटिस तक नहीं थमाया जाता। अन्य कब्जाधारकों के बारे में ग्राम पंचायत द्वारा हमेशा से एक ही रटा रटाया जवाब दिया जाता रहा कि ऐसे हम कैसे कह सकते हैं कि वे कब्जाधारी हैं, जब तक निशानदेही नहीं हो जाती। जब ग्राम पंचायत को निशानदेही के लिए बोला जाता तो कोई न कोई बहाना बनाकर टाल मटोल कर दी जाती। जबकि दिलचस्प बात यह है कि मांगाराम कम्बोज को कोर्ट घसीटने के लिए ग्राम पंचायत को किसी निशानदेही की जरुरत नहीं पड़ती। अब भी गाँव में जो निशानदेही करवाई गई है, यह मांगाराम की पिछले डेढ़ साल में की गई भाग दौड़ का नतीजा है। इस निशानदेही को रुकवाने के लिए अफसरों पर राजनीतिक दबाव बनाने से लेकर हर तरह के हथकंडे अपनाए गए। लेकिन मांगाराम अपने इरादे पर अडिग रहे और सीएम से लेकर आलाधिकारियों को निशानदेही करवाने की गुहार लगाते रहे। राज्य व जिला से लेकर ड स्तर तक सैकड़ों बार पत्र लिखने के परिणामस्वरुप प्रशासन को मांगाराम की बात माननी पड़ी और इसी साल 7 फरवरी से 28 फरवरी 2025 तक तहसील नारनौंद द्वारा गाँव की समस्त पंचायती जमीन, जोहड़ों व फिरनी की निशानदेही करवाई गई जिसकी रिपोर्ट अभी हाल ही में आई है। इस निशानदेही रिपोर्ट के मुताबिक गाँव की करीब 28 एकड़ पंचायती जमीन पर 746 अवैध कब्जाधारी पाए गए हैं जिनमें 10 मौजूदा पंच हैं। इसके अलावा कुछ पूर्व पंच, पूर्व सरपंच, नंबरदार व गाँव के प्रभावशाली रसूखदार लोग भी पंचायती जमीन पर कुंडली मारे बैठे हैं। कब्जा की गई पंचायती जमीन की कलेक्टर रेट के हिसाब से वर्तमान कीमत लगभग 26 करोड़ रुपए बताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक गाँव में 732 ग्रामीणों के पंचायती जमीन पर तो 14 के कृषि योग्य पंचायती जमीन पर अवैध कब्जे पाए गए हैं। कब्जा की गई पंचायती जमीन का कुल रकबा 123811 स्क्वेयर यार्ड तो कब्जायुक्त कृषि जमीन का कुल रकबा 11592 स्क्वेयर यार्ड है जो कि दोनों मिलाकर लगभग 28 एकड़ बन रहा है। कब्जा की गई पंचायती जमीन की वर्तमान क्लेक्टर रेट के मुताबिक कीमत लगभग 25 करोड़ बताई जा रही है जबकि कृषि आधारित जमीन की कीमत 42.50 लाख है।

ग्राम पंचायत द्वारा किए केस से अब तक लाखों रुपया हो गया बर्बाद और बीमारियों ने घेरा, पढ़िए मांगाराम कम्बोज की जुबानी
मांगाराम की मानें तो यह सब पूर्व की ग्राम पंचायतों द्वारा रचे गए षडयंत्र का परिणाम है। जो आज मेरी हालत है, उसके लिए गांव के ही एक पूर्व सरपंच समेत कुछ लोग जिम्मेदार हैं। वे कहते हैं कि हैरानी होती है 8 हजार की आबादी वाले गाँव में ग्रामीणों का जमीर कहाँ मर गया है। क्या किसी भी व्यक्ति को मेरे साथ हो रहे अन्याय बारे मालूम नहीं है। पूरा गाँव जानता है कि मेरे साथ ग्राम पंचायत द्वारा अन्याय किया जा रहा है लेकिन सार्वजनिक तौर पर कोई भी बोलने को तैयार नहीं। दो-चार को छोड़कर सभी ग्रामीण तमाशबीन बने हैं तथा ग्राम पंचायत द्वारा की जा रही कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं लेकिन अन्य 745 अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ मुंह खोलने को कोई तैयार नहीं हैं। मांगाराम कहते हैं कि ग्राम पंचायत द्वारा मेरे खिलाफ किए गए अवैध कब्जे के केस पर अब तक मेरा लाखों रुपया बर्बाद हो चुका है। रोजाना कोर्ट की भागदौड़ से तंग आ चुका हूँ और मैं हर समय टेंशन में रहता हूँ। ग्राम पंचायत द्वारा किए इसी केस की वजह से मैं बीपी, शुगर समेत अनेक गंभीर बीमारियों का शिकार हो चुका हूं। इस केस की वजह से अपने परिवार पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रहा हूँ। मुझे सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि ग्राम पंचायत द्वारा अकेले मुझे ही टारगेट क्यों किया गया जबकि आधा गाँव अवैध कब्जे पर बैठा है। आखिर मैंने इनका क्या बिगाड़ा था। यही बात मैं पिछले 18 साल में पूरे गाँव के सामने रख चुका हूँ लेकिन 2-4 को छोड़कर कोई समझने को तैयार नहीं है कि यह पंचायत द्वारा की गई जुल्म की इंतहा है। मैं सार्वजनिक तौर पर ग्राम पंचायत से अपने किए गुनाह की झोली फैलाकर माफी भी मांग चुका हूँ लेकिन फिर भी ग्राम पंचायत मेरे ही पीछे लगी है जबकि बाकि 745 अवैध क्ब्जाधारक मजे से रह रहे हैं। अब तो वर्तमान पंचायत मेंबरों, पूर्व सरपंचों, पूर्व पंचों का भी अवैध कब्जा साबित हो चुका है क्या अब उनके खिलाफ भी ग्राम पंचायत कोर्ट में केस दर्ज करवाएगी। क्या उनसे भी सार्वजनिक तौर पर माफी मंगवाई जाएगी। यदि ग्राम पंचायत इतनी ईमानदार है तो अब जो अवैध कब्जाधारी पंच पाए गए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करवाए। उन्हें कब्जा बेदखली के नोटिस भेजे। उन्हें उसी प्रकार कोर्ट घसीट ले जाए जैसे मुझे घसीटा गया था और इन सभी कब्जाधारी पंचों की पंचायत सदस्यता रद्द करवाए। लेकिन मैं जानता हूँ ऐसा नहीं होगा क्योंकि मुझे षडयंत्र के तहत प्रताड़ित कया जा रहा है। अब तो कोई बहाना भी नहीं रहा। निशानदेही रिपोर्ट में दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस ‘‘धृतराष्ट्र नगरी’’ में कौन इंसाफ की बात करता है और कौन अन्याय की ? 

लो आ गई लोहारी राघो निशानदेही रिपोर्ट, 28 एकड़ पंचायती जमीन पर काबिज पाए गए 746 अवैध कब्जाधारी जिनमें 10 मौजूदा पंच, यहां देखें कब्जाधारकों की पूरी कुंडली

जानें क्या है पूरा मामला
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण मांगा राम कम्बोज ने गत वर्ष 5 अप्रैल 2024 को सीएम विंडो, सीएम कार्यालय, राज्य चुनाव आयोग, डायरेक्टर पंचायत हरियाणा, उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी हिसार,डीडीपीओ हिसार, बीडीपीओ नारनौंद व एसडीएम नारनौंद समेत आलाधिकारियों को ई-मेल से भेजी शिकायत में जिला हिसार की तहसील नारनौंद अंतर्गत ग्राम पंचायत लोहारी राघो में मौजूदा पंचों द्वारा ग्राम शामलात देह, चरांद भूमि, फिरनी,  जोहड़ों व काश्त, गैर काश्त समेत गाँव की समस्त पंचायती भूमि पर किए गए अवैध कब्जों की जानकारी देते हुए कब्जाधारक पंचों की सदस्यता रद्द किए जाने व इनके खिलाफ सख्त से सख्त प्रशासनिक व कनूनी कार्रवाई किए जाने समेत संबंधित वार्डों में पंचायत चुनाव दोबारा से करवाए जाने की गुहार लगाई थी। इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग, हरियाणा कार्यालय द्वारा दो बार उपायुक्त एवं जिला निवार्चन अधिकारी (पं0) हिसार को भेजे गए पत्र क्रमांक रा0नि0आ0/2 ई-।।/2024/257, दिनांक 16.04.2024 तथा रा0नि0आ0/2 ई-।।/2024/492, दिनांक 11.06.2024 द्वारा मांगाराम कम्बोज पुत्र सोनाराम कम्बोज, गाँव लोहारी राघो, तहसील नारनौंद, जिला हिसार से प्राप्त शिकायत की प्रति भेजकर मामले में आवश्यक कार्यवाही करके कार्यवाही बारे राज्य निर्वाचन आयोग व शिकायतकर्ता को सूचित करने के निर्देेष दिए गए थे। इस संबंध में तहसील नारनौंद द्वारा ग्राम पंचायत लोहारी राघो में निशानदेही संबंधी कार्य 7 फरवरी 2025 से
28 फरवरी 2025 तक पूरा कर लिया गया है जिसकी नकल रिपोर्ट तहसील कार्यालय नारनौंद से 10  जून 2025 को प्राप्त हुई जो कि साथ में सलंग्न है। जिला प्रशासन द्वारा करवाई गई इस निशानदेही रिपोर्ट के मुताबिक ग्राम पंचायत लोहारी राघो के 18 में से 10 वर्तमान पंचायत सदस्य पंचायती जमीन पर काबिज पाए गए हैं। पहले तो राजनीतिक दबाव बनाकर एक साल तक निशानदेही को टाला जाता रहा और बाद में निशानदेही हो जाने के उपरांत रिपोर्ट को जान बूझकर 4 माह तक लटकाया गया ताकि शिकायतकर्ता इस मामले से किनारा कर ले तथा अवैध कब्जाधारक पंचों के खिलाफ कोई कार्रवाई न हो पाए।


जानें लोहारी राघो में कुल कितनी जमीन पर अवैध कब्जे और कितने कब्जाधारी
खसरा नंबर                      अवैध कब्जा क्षेत्र        कुल कब्जाधारी
197,98,214                    11089 वर्ग गज            74
370,69                           33454                       115
371,72                           50251                       275
373                               10571                         78
374                               13858                        132
380                                4588                          58
कृषि योग्य जमीन             11592                        14
कुल अवैध कब्जे             135403 वर्ग गज           746

निशानदेही रिपोर्ट में मिली ये गड़बड़ियां, कहाँ गायब हो गए 51 नाम  
निशानदेही रिपोर्ट में 77 कब्जाधारकों का कब्जा क्षेत्रफल के सामने 0 दर्ज किया गया है जो कि सवालों के घेरे में है। अब ये 77 लोग कौन  हैं, ग्राम पंचायत के चहेते हैं या किसी नेता या प्रभावशाली व्यक्ति के कहने पर ऐसा किया गया है, यह सब जांच का विषय है। जब इस बारे में रिपोर्ट तैयार करने वाली एजेंसी से बात की गई तो उनका कहना था कि जिन कब्जाधारकों के कब्जा विवरण के सामने संख्या 0 दर्शाई गई है, इन लोगों को यह जगह केंद्र व हरियाणा सरकार द्वारा विभिन्न आवास योजनाओं के तहत अलग-अलग सालों में आवंटित की गई है। अब यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि क्या वास्तव में इन सभी 77 कब्जाधारकों को सरकार द्वारा आवास योजनाओं के तहत ये जगह आवंटित की गई है। यदि ऐसा नहीं है तो रिपोर्ट पर सवाल उठना लाजिमी है। इसके अलावा निशानदेही रिपोर्ट में जो एक और खामी पकड़ में आई है, वह यह कि खसरा नंबर 373 में क्रम संख्या 1 के बाद सीधा क्रम संख्या 33 आ जाता है और क्रम संख्या 40 के बाद सीधा 60। अब इन सख्ंयाओं के बीच वाले 51 कब्जाधारकों के नाम आखिर कहां गायब कर दिए गए हैं। क्या क्रम संख्या 2 से 32 व 41 से 59 तक के नामों को किसी ने कटवा दिया है या फिर रिपोर्ट से छेड़छाड़ करवाई गई है। यह भी संदेहास्पद है तथा जांच का विषय है कि रिपोर्ट से छेड़छाड़ की गई या जानबूझ कर चहेते कब्जाधारकोंं के नाम लिस्ट से गायब करवा दिए गए।

कार्रवाई से बचने को पंचों ने लिखवा दिए अपने परिजनों के नाम
निशानदेही रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कब्जाधारक कई मौजूदा पंचों ने निशानदेही रिपोर्ट में प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अपने परिजनों के नाम लिखवा दिए हैं जबकि वे आज भी उसी कब्जा की हुई जमीन पर रह रहे हैं और इनमें से अधिकतर के नाम का सूचना बोर्ड भी इसी कब्जा की गई जमीन पर लगा है। निशानदेही करने आई एजेंसी को किसी कब्जाधारक पंच ने अपने पिता का नाम लिखवा डाला तो किसी ने अपने पति, ससुर, भाई तथा देवर का। इसके अलावा इस मामले में सीएम कार्यालय के आदेश पर की गई पुलिस जांच के दौरान ये सभी कब्जाधारक पंच पंचायती जमीन पर किसी तरह का कोई अवैध कब्जा न किए जाने के झूठे ब्यान दर्ज करवा चुके हैं। पंचायत चुनाव 2022 के समय भी इन पंचों द्वारा चुनाव अधिकारी के समक्ष जमा करवाए गए शपथ पत्रों में भी पंचायती जमीन पर कब्जा न होने का हवाला दिया गया था जो कि सरासर झूठा निकला। क्योंकि अब निशानदेही रिपोर्ट में उक्त पंचों
का अवैध कब्जा  साबित हो चुका है तथा ये सभी कब्जाधारक पंच 2022 के पंचायत चुनाव से पहले से ही पंचायती जमीन पर अवैध कब्जा जमाए हुए हैं।


पंचायती जमीन पर चल रहा पंजाब नैशनल बैंक, रिपोर्ट में खुली पोल
जिला प्रशासन द्वारा करवाई गई निशानदेही रिपोर्ट में एक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। गाँव लोहारी राघो में पिछले लगभग 12-13 साल से जिस जगह पर पंजाब नैशनल बैंक चल रहा है, उस जगह को भी अवैध कब्जे में दर्शाया गया है यानि कि उस जगह पर अवैध कब्जा है। सूत्रों से पता चला है कि पंजाब नैशनल बैंक इस भवन के लिए इसके मालिक को पिछले कई सालों से किराया अदा कर रहा है। निशानदेही रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में जिस जगह पर पंजाब नैशनल बैंक स्थित है, वह जगह खसरा नंबर 371-372 में है। और निशानदेही रिपोर्ट में सीरियल नंबर 136 पर इस जगह को अवैध कब्जे में हरिश पुत्र शामदास के नाम से दर्शाया गया है। 

742 अवैध कब्जाधारक, ग्राम पंचायत ने सिर्फ एक को घसीटा कोर्ट
प्रशासन द्वारा करवाई गई निशानदेही में ग्राम पंचायत लोहारी राघो में पंचायती जमीन पर कुल 742 अवैध कब्जाधारक पाए गए हैं। लेकिन ग्राम पंचायत द्वारा अब तक सिर्फ एक ही अवैध कब्जाधारक मांगाराम कम्बोज के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया है। पंचायती जमीन कब्जाने का यह केस पिछले 17 साल से कब्जाधारी मांगाराम कम्बोज के खिलाफ न्यायालय में चल रहा है। अब सवाल उठता है कि ग्राम पंचायत को सिर्फ एक ग्रामीण का अवैध कब्जा तो दिखाई दे गया बाकि के 741 अवैध कब्जाधारक क्यों नहीं दिखाई दिए। पंचायती जमीन पर अवैध कब्जों का यह सिलसिला पूर्व की पंचायतों में चला और पूर्व सरपंचों की शह से ही ये अवैघ कब्जे करवाए जाते रहे। पूर्व सरपंच ने चुनावी रंजिश के चलते सिर्फ एक ग्रामीण मांगाराम कम्बोज के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया तथा अन्य कब्जाधारकों पर आज तक आंखें मूंदे रहे तथा बेखौफ होकर अवैध कब्जे करवाते रहे। अब शिकायतकर्ता का कहना है कि क्या अब ग्राम पंचायत इन 741 अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ भी केस दर्ज करवाएगी या इन्हें कब्जा बेदखली के नोटिस भेजेगी क्योंकि अब तो इन सभी पर अवैध कब्जा साबित भी हो चुका है। 

पंचायती जमीन के अभाव में दूसरे गाँवों को आवंटित हो गए कई प्रोजेक्ट
पंचायती जमीन पर कब्जों का गांव को एक नुकसान यह भी हुआ कि प्रदेश व केंद्र सरकार की और से पिछले कई सालों में गाँव लोहारी राघो को आवंटित हुए कई प्रोजेक्ट महज इसलिए साथ लगते गाँवों की पंचायतों को आवंटित कर दिए गए क्योंकि गाँव लोहारी राघो के पास पंचायती जमीन नहीं थी। ग्राम पंचायत के हिस्से जो भी बड़े प्रोजेक्ट आए, वे जमीन की कमी के कारण ही दूसरे गाँवों में चले गए क्योंकि ग्राम पंचायत अपनी टिप्पणी में गांव में पंचायती जमीन न होने का जवाब दिया जाता रहा। लेकिन आज तक  किसी भी पंचायत ने इन 28 एकड़ जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को छुड़वाना तो दूर की बात, इन कब्जाधारकों को एक नोटस तक नहीं थमाया गया। 


सभी कब्जाधारी पंचों व अन्य पर होगी सख्त कार्रवाई
गाँव लोहारी राघो में पंचायती जमीन की निशानदेही रिपोर्ट में पाए गए अवैध कब्जों संबंधी शिकायत मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक जिन भी पंचायत सदस्यों व ग्रामीणों के पास अवैध कब्जा पाया गया है, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।  
विकास यादव
एसडीएम नारनौंद



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Sandeep Kamboj

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"मैं संदीप कंबोज, लोहारी राघो की मिट्टी का एक छोटा सा अंश हूँ। मेरा उद्देश्य पत्रकारिता और ब्लॉगिंग के माध्यम से हरियाणा की समृद्ध विरासत, विशेषकर हड़प्पा कालीन इतिहास को जीवंत रखना है। मेरा मानना है कि हमारी जड़ें जितनी गहरी होंगी, भविष्य का वृक्ष उतना ही विशाल होगा। इस वेबसाइट के माध्यम से मैं आपको अपने गाँव के इतिहास, संस्कृति और आधुनिक बदलावों की यात्रा पर ले जाना चाहता हूँ।"

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