- इमाम अली की जान के दुश्मन बन बैठे थे अंग्रेज
- लोहारी राघो के फकीर बाबा बख्शु शाह की चौथी पीढ़ी से थे इमाम अली
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| इमाम अली, बाबा बख्शू शाह की चौथी पीढ़ी से यानि की बाबा बख्शु शाह के पड़पोते |
Imam Ali in British Police from Lohari Ragho Before 1947
संदीप कम्बोज
लोहारी राघो। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए प्रत्येक आन्दोलन में गाँव लोहारी राघो के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने अजीज देश भारत को आजाद कराने के एक लम्बे और कड़े संघर्ष में न केवल बहादुरी की मिसाल पेश की बल्कि दिल दहलाने वाली यातनाएं भी झेली। Imam Ali Story Gadar of Lohari Ragho गोरे अंग्रेज गाँव लोहारी राघो के एक बहादुर इमाम अली की जान के दुश्मन बन बैठे थे तथा उन्हें दबोचने के लिए गाँव में कई बार दबिश दी। वर्ष 1894 में जन्मे इमाम अली लोहारी राघो के सूफी फकीर बाबा बख्शू शाह की चौथी पीढ़ी से थे यानि की बाबा बख्शु शाह के पड़पोते। गाँव लोहारी राघो में इनका मकान आज जहां रामस्वरुप वैद्य का घर है,ठीक उनके घर के सामने आस-पास ही था। वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय बने हालात के मद्देनजर न चाहते हुए भी इमाम अली को परिवार समेत गाँव लोहारी राघो को छोड़कर जाना पड़ा। लोहारी राघो को छोड़कर जाने के समय वर्ष 1947 में इमाम अली की आयु 53 वर्ष थी। ये वही इमाम अली हैं जब भारतवर्ष में रहते हुए इन्होंने ब्रिटिश पुलिस की नौकरी ज्वाइन कर ली थी लेकिन अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर किए जा रहे जुल्म इनसे देखे नहीं गए व एक अंग्रेज पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी की धुनाई कर नौकरी छोड़कर वापिस लोहारी राघो भाग आए। History of Lohari Ragho by Sandeep Kamboj अंग्रेजों से दुश्मनी इन्हें इस कदर महंगी पड़ी की गोरे इनकी जान के दुश्मन बन बैठे व इन्हें गिरफ्तार करने के लिए गाँव लोहारी राघो में कई बार दबिश दी। Lohari Ragho News एक बार तो अंग्रेज पुलिस ने गोलियां भी चला दी थी जिनमें से एक गोली इनकी जांघ पर लगी जिसका निशान उनके मरते दम तक मौजूद था। 10 मई 2009 को 115 वर्ष की आयु में इमाम अली का देहांत हो गया। आज इमाम अली के बेटे असगर अली(बाबा बख्शू शाह की पांचवीं पीढ़ी)व पोते कामरान राव व इमरान अली(बाबा बख्शू शाह की छठी पीढ़ी) गाँव टिब्बा रावगढ़ में रहे रहे हैं।Lohari Ragho History
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