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लोहारी राघो में फिर उठी मनरेगा घोटाले की सड़ांध, सुर्खियों में आया लोहारी राघो मनरेगा घोटाला पार्ट-2 ! गरीब मजदूर बेरोजगार, घोटालेबाज मालामाल, लोहारी राघो मनरेगा की काली कहानी राजनीति के जाम में फंसी राखीगढ़ी तक जाने वाली सड़क, सीएम घोषणा वाला हिसार-जींद हाईवे प्रोजेक्ट 11 साल बाद रद्द लोहारी राघो के विकास पुरुष नंद किशोर चावला की 35 साल की संघर्ष गाथा, जिन्होंने राजनीति और सिस्टम से लड़कर गाँव का विकास कराया,एक आम नागरिक बनाम पूरे सिस्टम की कहानी

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संदीप कंबोज
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Welcome to Harappa Village लोहारी राघो इतिहास की मिट्टी से लेकर विकास, संस्कृति और एकता का संगम खबरें, विकास और हमारी पहचान अब एक ही मंच पर जो छुपाया जा रहा है वही हम दिखाएंगे हम किसी पार्टी या नेता के गुलाम नहीं हम सिर्फ सत्य और संविधान के साथ

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Welcome to Harappa Village Lohari Ragho : इतिहास की मिट्टी से लेकर विकास, संस्कृति और एकता का संगम। देखें गाँव लोहरी राघो की आधिकारिक वेबसाइट — खबरें, विकास और हमारी पहचान अब एक ही मंच पर

इनसे मिलिए ये हैं लोहारी राघो के ‘मिथुन’, सोशल मीडिया पर धूम मचा रहे इस स्टार गायक के वीडियो

  •  बॉलीवुड स्टार मिथुन से हू-ब-हू मिलता है लोहारी राघो के इस स्टार गायक का चेहरा 
  • टिक-टॉक बैन के बाद स्टार मेकर, स्नेक, रोपोसो व यू-ट्यूब पर भी धमाल मचा रहे कृष्ण बड़गुजर के वीडियो 
  • इंस्टाग्राम पर 89,500 लोगोें ने किया पसंद तो 7252 लोग कर रहे फोलो 



लोहारी राघो. com
संदीप कम्बोज। प्रवीन खटक 
लोहारी राघो। गाँवों में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है। हर किसी के अंदर कोई न कोई प्रतिभा जरूर छिपी है, बस जरूरत है उसे तलाशने व तराशने की। आज हम आपको एक ऐसी ही ग्रामीण प्रतिभा से मिलवाने जा रहे हैं जो हू-ब-हू बालीवुड स्टार मिथुन चक्रवर्ती के हमशक्ल हैं और पिछले कई सालों से सोशल मीडिया पर धूम मचाए हुए हैं। हम बात कर रहे हैं गाँव लोहारी राघो के स्टार गायक कृष्ण बड़गुजर की। 41 वर्षीय इस गायक के वीडियो आजकल हर युवा दिल की धड़कन बने हुए हैं। इस स्टार गायक के सोशल मीडिया पर हजारों फोलोअर्स हैं। अकेले इंस्टाग्राम पर 89,500 फैंस हैं जबकि 7252 लोगों ने फोलो किया है। टिक-टॉक पर बैन लगाए जाने के बाद इस स्टार गायक के वीडियो इन दिनों यू-ट्यूब, स्टार मेकर, स्नेक व रोपोसो पर धमाल मचा रहे हैं। अभी हाल ही में स्टार मेकर पर पोस्ट किए गए कृष्ण बड़गुजर के वीडियो ‘दीवाने हैं दीवानों को नजर चाहिए’ को चंद ही घंटों में हजारों लोगों ने देखा व पसंद किया है। इस प्रसिद्ध युवा गायक कृष्ण बड़गुजर ने अब तक अनेक धार्मिक, सामाजिक व राष्टÑभक्ति से सराबोर गीत भी बनाए हैं जो फैंस को बहुत पसंद आ रहे र्हैं। महामारी कोरोना को लेकर बनाया गया कृष्ण बड़गुजर का ‘कोरोना को भगाना है’ गाना भी अब तक हजारों बार देखा व सुना जा चुका है। कृष्ण बड़गुजर द्वारा रचित धार्मिक गीत ‘नया जमाना नाम भूल गया कृष्ण मुरारी का, पैसे से मतलब रह गया दुनिया सारी का’ जमाने को जबरदस्त संदेश दे रहा है। अपने सोशल मीडिया अकाऊंटस पर वे जब भी कोई वीडियो पोस्ट करते हैं तो चंद ही मिनटों में उनका वीडियो टॉप ट्रेंड करने लगता है। सैकेंड दर सैकेंड व्युवर्स और लाईक का ग्राफ बढ़ने लगता है। गायन व संगीत रचना में वे अब  तक अनेक बार सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। पेशे से पेंटर का काम करने वाला यह शख्स देखते ही देखते कैसे बन गया स्टार गायक व सोशल मीडिया स्टार और किस तरह से युवा इनके गीतों पर झूम उठते हैं। लोहारी राघो.कॉम में आज हम आपको बताने जा रहे हैं इसके पीछे की पूरी दिलचस्प कहानी।

12 की उम्र में रामलीला से शुरु की गायन यात्रा 
स्टार गायक कृष्ण बड़गुजर

5 अप्रैल 1979 को गाँव लोहारी राघो निवासी प्यारे लाल बड़गुजर के घर जन्में कृष्ण बड़गुजर को बचपन से ही गायन का शौंक था। हर समय कुछ न कुछ गुनगुनाते रहना इनकी आदत बन चुका था। संगीत की इसी ललक को पूरा करने के लिए बचपन में ही वे घर में पुराना रेडियो ले आए तथा आकाशवाणी पर प्रसारित होने वाले संगीत कार्यक्रम को घंटों तक सुना करते। कृष्ण बड़गुजर की गायन यात्रा की शुरुआत उस समय हुई जब ये छठी कक्षा में थे। महज 12 साल की उम्र में पहली बार वर्ष 1991 में गाँव में आयोजित रामलीला के दौरान मंच पर बोलने का मौका मिला तो यहीं से इनके गायन सफर की शुरुआत हो गई। कृष्ण बड़गुजर बताते हैं कि पहली बार रामलीला में बोलने का मौका मिला तो मैंने उन्हीं दिनों रिलीज हुई सलमान खान की फिल्म कुर्बान का गाना ‘तू जब-जब मुझको पुकारे, मैं दौड़ी आऊं नदिया किनारे’ गाया था। पंडाल में दर्शकों से तालियों के रूप में मिले बेइंतहा प्यार से मेरा जोश दोगुना हो गया। इसी दिन मुझे अहसास हो गया था कि आगे चलकर मैंने यही करना है और मैंने प्रण कर लिया कि मैं जीवन में गायक जरुर बनूंगा। लेकिन दो साल बाद वर्ष 1993 में पिता के स्वर्ग सिधारते ही परिवार की जिम्मेदारी आन पड़ी। एक गरीबी और ऊपर से पारिवारिक जिम्मेदारी और खुद की पढ़ाई भी। 5 बहन भाईयों में सबसे बड़ा होने के कारण सभी को पढ़ा-लिखाकर विवाह किया। लेकिन आर्र्थिक तंगी व पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से खुद 12वीं के बाद पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

मास्टर सुबे सिंह इंदौरा ने दिखाई संगीत की राह 
कृष्ण बड़गुजर के अनुसार ढ़ोलक बजाना उन्होंने बचपन में ही सीख लिया था। जब वे छोटे थे तो गाँव में आयोजित सत्संग व अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में ढ़ोलक बजाया करते थे। इस दौरान हारमोनियम मास्टर सुबे सिंह इंदौरा ने उन्हें गायन की प्रेरणा दी व प्रैक्टिस करवाने लगे। कुष्ण बड़गुजर मानते हैं कि यह उनके गुरु मास्टर सुबे सिंह इंदौरा की ही दिखाई हुई राह है जिस पर चलकर वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
                                               
जागरण कार्यक्रमों में भी दे रहे परफोर्मेंस
गायन,लेखन और संगीत रचना को जुनूनी हद तक चाहने वाले कृष्ण बड़गुजर को रामलीला के अलावा स्कूल के कार्यक्रमों व अन्य संगीत प्रतियोगिताओं में परफोर्मेंस देने के दौरान वाहवाही मिलने लगी। आगे चलकर कृष्ण ने जागरण व अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेना शुरु कर दिया।लोक संगीत और हरियाणवी गानों मेंं भी हाथ आजमाया। वे अब तक गाँव लोहारी राघो के स्क्ूल के अलावा गाँव मोठ के सरकारी स्कूल, हिसार स्थित कबीर छात्रावास में गायन परफोर्मेंस देने के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब व जम्मू कश्मीर में जागरण कार्यक्रमों में अपनी आवाज का जादू बिखेर चुके हैं। कृष्ण बड़गुजर के पसंदीदा गायकों में किशोर कुमार व मोहम्मद रफी का नाम उल्लेखनीय है।

 मिथुन चक्रवर्ती से मिलने गए थे मुंबई, नहीं हो पाई मुलाकात
बालीवुड स्टार मिथुन चक्रवर्ती के हमशक्ल कृष्ण बड़गुजर जीवन में एक बार मिथुन चक्रवर्ती से अवश्य मिलना चाहते हैं। इसी उम्मीद के साथ वे दो-तीन बार मुंबई जा चुके हैं लेकिन उनसे मुलाकात की हसरत दिल में ही रह गई। वे अन्य फिल्म स्टारों से मिलकर लौट आए। कृष्ण बड़गुजर चाहते हैं कि मिथुन चक्रवर्ती एक बार उनसे मुलाकात कर लें तो उनकी जीवन की सबसे बड़ी हसरत पूरी हो सकती है।

कोरोना व लॉकडाऊन ने तोड़ डाली कलाकारों की कमर
गायक कृष्ण बड़गुजर के अनुसार जब से कोरोना महामारी ने व्यापक रूप धारण किया है तब से ही कलाकारों के सामने घोर संकट खड़ा हो गया है। लॉकडाऊन से पहले जागरण व अन्य कार्यक्रमों मेंं निमंत्रण मिलता रहता था लेकिन जब से लॉकडाऊन हुआ, उसके बाद से आज तक कोई निमंत्रण नहीं आया, न जागरण का और नही किसी अन्य कार्यक्रम का। सरकार को कलाकारों की तरफ भी ध्यान देना चाहिए खासकर छोटे कलाकारों की तरफ जो गायन व अपने अभिनय से अपनी आजीविका चलाते हैं।                                                                                                                                                                                                                                                                     
                                                                                                                                                                  

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Sandeep Kamboj

Sandeep Kamboj

"मैं संदीप कंबोज, लोहारी राघो की मिट्टी का एक छोटा सा अंश हूँ। मेरा उद्देश्य पत्रकारिता और ब्लॉगिंग के माध्यम से हरियाणा की समृद्ध विरासत, विशेषकर हड़प्पा कालीन इतिहास को जीवंत रखना है। मेरा मानना है कि हमारी जड़ें जितनी गहरी होंगी, भविष्य का वृक्ष उतना ही विशाल होगा। इस वेबसाइट के माध्यम से मैं आपको अपने गाँव के इतिहास, संस्कृति और आधुनिक बदलावों की यात्रा पर ले जाना चाहता हूँ।"

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