- रसायन शास्त्र में रिसर्च व उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने पुरस्कार स्वरुप प्रदान किया एक लाख रुपए का चेक व प्रशस्ति पत्र
- गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (आईपीयू) में रसायन शास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर हैं डॉ. गुलशन धमीजा
- गाँव लोहारी राघो निवासी बहादर चंद धमीजा के हैं पुत्र
- डॉ. गुलशन धमीजा की उपलब्धि पर ग्रामीणों में खुशी की लहर
| लोहारी राघो। गु रू गो विंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (आईपीयू) के प्रोफेसर डॉ. गुलशन धमीजा को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड प्रदान करते दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया। |
नई दिल्ली/लोहारी राघो। गाँव लोहारी राघो के एक और बेटे ने देश की राजधानी दिल्ली में गाँव का नाम गर्व से रोशन किया है। (The-Delhi-Government-presented-the-Best-Teacher-Award-to-Professor-Dr-Gulshan-Dhamija-son-of-Lohari-Ragho) नईदिल्ली स्थित गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (आईपीयू) के यूनिवर्सिटी स्कूल आॅफ बेसिस एंड अप्लाईड साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गुलशन धमीजा को दिल्ली सरकार की ओर से सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार रसायन शास्त्र में रिसर्च तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिल्ली सचिवालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली के उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रदान किया। इस मौके पर आईपीयू के कुलपति पद्मश्री प्रो. (डॉ.) महेश वर्मा व रजिस्ट्रार शैलेंद्र सिंह परिहार भी मौजूद रहे। उन्हें पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति पत्र के साथ एक लाख रूपए का चेक प्रदान किया गया है। बता दें कि मूल रुप से हरियाणा के जिला हिसार के गाँव लोहारी राघो निवासी डॉ. गुलशन धमीजा रसायन शास्त्र के प्रसिद्ध शिक्षक हैं। डॉ. धमीजा ने वर्ष 2004 में गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (आईपीयू) से पीएचडी करने के उपरांत तुरंत बाद वर्ष 2005 में आईपीयू में ही बतौर रसायन शास्त्र एसिस्टेंट प्रोफेसर ज्वाईन किया। 2019 में प्रोन्नत होकर एसोसिएट प्रोफेसर बन गए। डॉ. गुलशन धमीजा पिछले 17 साल से लगातार आईपीयू में सेवाएं दे रहे हैं। बता दें कि गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (आईपीयू) से 120 कॉलेज संबद्ध हैं।
रसायन शास्त्र रिसर्च को लेकर 25 से अधिक देशों की यात्रा कर चुके हैं डॉ. गुलशन धमीजा
डॉ. गुलशन धमीजा का रसायन शास्त्र रिसर्च के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान है। वे कई राष्ट्रीय व अंर्तराष्ट्रीय समितियों के सदस्य हंै और 25 से अधिक देशों की यात्रा अनुसंधान प्रयोजनों के लिए कर चुके हैं। कोविड काल के दौरान उनके 20 रिसर्च पेपर्स इंटरनेशनल जनरल में प्रकाशित हो चुकें हैं। इसके अलावा वो परीक्षा व डायरेक्टरेट के कार्यों के अलावा आईपीयू में स्टूडेंट वेलफेयर में भी एक्टिव रहते हैं। फिलहाल वे आईपीयू में स्टूडेंट वेल्फेयर के साथ-साथ कैंपस डायरेक्टर भी हैं।
पीएचडी करने वाले लोहारी राघो सरकारी स्कूल के पहले स्टूडेंट हैं डॉ. गुलशन धमीजा
जिला हिसार के गाँव लोहारी राघो निवासी बहादर चंद धमीजा के घर जन्मे डॉ. गुलशन धमीजा ने वर्ष 1992 में गाँव लोहारी राघो के राजकीय हाई स्क्ूल से मैट्रीक की परीक्षा उतीर्ण की थी। बचपन से ही मेधावी डॉ. गुलशन धमीजा 8वीं की परीक्षा में टॉपर भी रहे थे। 44 वर्षीय डॉ. गुलशन धमीजा गाँव लोहारी राघो के सरकारी स्कूल के पहले स्टूडेंट हैं जिन्होंने पीएचडी की है।
डॉ. गुलशन धमीजा की उपलब्धि पर लोहारी राघो को नाज
डॉ. गुलशन धमीजा की इस शानदार उपलब्धि पर गाँव लोहारी राघो के ग्रामीणों को नाज है तथा उन्हें बधाई देने के लिए लगातार कॉल आ रहे हैं। वास्तव में ही डॉ. गुलशन धमीजा ने राजधानी दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का सम्मान हासिल कर गाँव लोहारी राघो का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।
जानें क्या है यह अवार्ड और कैसे होता है चयन
बता दें कि साल 2019 में दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में शानदार कार्य करने वाले प्रवक्ताओं को सम्मानित करने का निर्णश् लिया था जो दिल्ली में उच्चशिक्षा के माध्यम से ऐसे समाज का निर्माण कर रहे हैं जहां एजुकेशन में एक्सीलेंस को महत्व दिया जाता है। इस अवार्ड के लिए प्रवक्ताओं का चयन करने के लिए स्टूडेंट फीडबैक, रिजल्ट में सुधार, रिसर्च कार्यों, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज और एकेडेमिक्स के साथ अन्य क्षेत्रों में प्रवक्ताओं द्वारा किए गए उनके योगदान को ध्यान में रखा जाता है। इन पक्षों का आंकलन करने के लिए कॉलेज व यूनिवर्सिटी स्तर पर एक मूल्यांकन कमिटी बनाई जाती है। पहले स्तर पर चयनित प्रवक्ताओं के नाम उच्च शिक्षा निदेशालय अंतिम चयन के लिए दिल्ली सरकार गठित चयन समिति के समक्ष रखता है जिससे उच्च शिक्षा सचिव, अंबेडकर व आईपीयू यूनिवर्सिटी के उपकुलपति, दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, शिक्षा निदेशक और उच्च निदेशक शामिल होते हैं। गाइडलाइंस के अनुसार सरकार द्वारा वित्तपोषित विश्वविद्यालय के 28 कॉलेजों से एक-एक व तीनों राज्य विश्वविद्यालयों में से प्रत्येक से दो प्रवक्ताओं को पुरस्कृत करने का प्रावधान है।
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