- रंग लाया नंद किशोर चावला का संघर्ष, उपायुक्त अनीश यादव का जताया आभार
- जल्द ही अलग जमीन खरीदकर परमानेंट कपास मंडी बनाए जाने की भी तैयारी
- भारतीय कपास निगम ने जारी किए ई-टेंडर
- 24 सितंबर को दोपहर सवा 11 बजे खोले जाने हैं टेंडर
नारनौंद। गाँव लोहारी राघो समेत उपमंडल नारनौंद के हजारों कपास किसानों के लिए खुशखबरी है। इस बार 1 अक्तूबर से कपास की खरीद के लिए लोहारी राघो में कपास मंडी शुरु होने जा रही है। (Cotton-mandi-is-going-to-start-in-Lohari-Ragho-cotton-procurement-will-start-from-October-1st) क्षेत्र के किसानों के लिए यह बड़ी सौगात है क्योंकि अब लोहारी राघो कपास मंडी परमानेंट हो गई है। अब हर साल यहां कपास की खरीद होगी। भारतीय कपास निगम ने प्रदेश में 23 स्थानों पर कपास की खरीद के लिए ई-टेंडर जारी कर दिए हैं। हिसार जिले में कपास की खरीद के लिए कुल पांच केंद्र बनाए गए हैं जिनमें हिसार, हांसी, बरवाला, आदमपुर तथा लोहारी राघो हैं। इस खबर से उपमंडल नारनौंद के किसानों में खुशी की लहर है क्योंकि अब उन्हें अपनी कपास के अच्छे दाम मिलेंगे साथ ही व्यापारी उनकी जेब भी नहीं काट पाएंगे। क्योंकि क्षेत्र में आसपास कपास की सरकारी खरीद न होने के कारण इलाके के किसान व्यापारियों के हाथों लुटने को मजबूर थे। और व्यापारी मनमाने दामों में कपास की खरीद करते थे जिससे किसानों को प्रति एकड़ 1500 रुपए से 2 हजार रुपए तक का नुकसान हो रहा था लेकिन अब लोहारी राघो में कपास की सरकारी खरीद होने से व्यापारी किसानों को नहीं लूट पाएंगे। क्षेत्र में कपास की खरीद न होने के कारण पहले किसानों को अपनी कपास बेचने के लिए हांसी या बरवाला की मंडियों में जाना पड़ता था लेकिन अब वे अपनी कपास अपने उपमंडल में ही नजदीकि कपास मंडी लोहारी राघो में बेच पाएंगे। बता दें कि नारनौंद उपमंडल में कपास खरीद के लिए यह एकमात्र केंद्र है जो इस साल से शुरु होने जा रहा है। कपास खरीद के लिए जो ऐजेंसियां इच्छुक हैं वे 24 सितंबर को दोपहर 11 बजे तक भारतीय कपास निगम की वेबसाईट पर ओनलाईन ई-टेंडर भर सकते हैं। 24 सितंबर को ही दोपहर सवा ग्यारह बजे ई-टेंडर को खोला जाएगा और यह तय हो जाएगा कि किन ऐजेसियों को कपास खरीद का टेंडर अलाट किया गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व वर्ष 2020 में भी गाँव लोहारी राघो में अस्थाई तौर पर कपास खरीद केंद्र की शुरुआत की गई थी जो कि सिर्फ एक साल ही चली। इस बार भारतीय कपास निगम ने लोहारी राघो को कपास मंडी घोषित कर यहां स्थाई तौर पर कपास की खरीद शुरु किए जाने का फैसला लिया है। अब यहां हर साल कपास की खरीद होगी और जल्द ही यहां अलग से कपास मंडी बनाए जाने की भी संभावनाएं हैं। गाँव लोहारी राघो में कपास मंडी शुरु किए जाने पर सर्वजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर चावला ने जिला उपायुक्त अनिश यादव का तहे दिल से आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र के किसानों के संघर्ष की जीत है। उन्होंने बताया कि गाँव लोहारी राघो में कपास की खरीद व स्थाई कपास मंडी शुरु किए जाने के लिए उन्होंने 25 अगस्त को जिला उपायुक्त को पत्र लिखा था तथा हिसार में आयोजित समाधान शिविर के दौरान मुलाकात भी की थी। डीसी अनिश यादव ने किसानों की मिांग को गंभीरता से लिया तथा भारतीय कपास निगम को गांव लोहारी राघो में स्थाई कपास मंडी शुरु किए जाने के आदेश दिए।
हर किसान को प्रति क्विंटल 1500 व प्रति एकड़ 12 हजार रूपए से भी अधिक का हो रहा नुक्सान
सर्वजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर चावला ने कहा कि सरकार बार-बार किसानों की आय दोगुनी करने के दावे कर रहे हैं। किसानों की आय दोगुना करने के अधिकारियों को भी दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। लेकिन किसान अपनी फसलों को औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर थे। उपमंडल नारनौंद के गाँवों के हजारों कपास किसान पिछले कई सालों से व्यापारियों व आढ़तियों के शोषण का शिकार हो रहे हैं। कपास का इलाका होने के बावजूदा मंडी लोहारी राघो में कपास की खरीद न होने के कारण किसान 8000 रूपए (सरकारी मूल्य कीबजाए महज 6000 रूपए प्रति क्विंटल में कपास बेचने को मजबूर थे। हर किसान को प्रति क्विंटल 1500 रूपए व प्रति एकड़ 12 हजार रूपए से अधिक का नुक्सान उठाना पड़ रहा था।
61 हजार एकड़ में कपास की बिजाई, करीब 4 अरब का है कारोबार
सर्वजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर चावला ने बताया कि इस बार गाँव लोहारी राघो समेत आस-पास के गाँवों में करीब 61 हजार 300 एकड़ में कपास की बिजाई की गई है। तो इस बार इस इलाके में कपास की खरीद का 3.66 अरब से भी अधिक का कारोबार है। अकेले नारनौंद ब्लॉक के गाँवों में 23300 एकड़ में कपास की बिजाई की गई है। मंडी लोहारी राघो के साथ ब्लॉक हांसी, बरवाला व उकलाना के भी कई गाँव लगते हैं। मंडी लोहारी राघो में कपास की सरकारी खरीद शुरू हो जाने से नारनौंद ब्लॉक के अलावा हांसी, बरवाला व उकलाना ब्लॉकों के भी कई गाँवों की कपास बिक्री के लिए यहीं आएगी। सरकार द्वारा कपास की डायरेक्ट खरीद करने से न केवल इलाके के किसानों को कपास के उचित दाम मिलेंगे और उनका शोषण भी रूक जाएगा।
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