- रामलीला देखने जुट रही श्रद्धालुओं की भीड़
- आज होना है राम जन्म मंचन
- जस्सी म्यूजिक प्रोडक्शन द्वारा किया जा रहा है लाइव प्रसारण
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लोहारी राघो। श्रवण कुमार अपने
माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर ले जाते हुए। तस्वीर में श्रवण कुमार के
किरदार में नजर आ रहे हैं विजेंद्र मुंडा, जबकि शांतनु के किरदार में
सार्थक भ्याना तथा शकुंतला के किरदार में प्रियेश मुंडा। तस्वीर : भ्याना
डिजिटल स्टूडियो |
राजेश भ्याना
लोहारी राघो। देश-प्रदेश में अपनी विशेष पहचान बना चुकी गाँव लोहारी राघो की ऐतिहासिक रामलीला का मंचन इस बार भी शुरू हो गया है। श्री रामा कल्ब लोहारी राघो द्वारा मंगलवार को दूसरे दिन आयोजित श्रवण लीला का अद्भुत व शानदार मंचन दर्शकों को माता-पिता की सेवा का गजब संदेश दे गया। श्रवण लीला मंचन के दौरान कलाकारों के अभिनय को देख हर आंख नम हो गई। हर किसी ने कलाकारों की मेहनत को दिल से सराहा। श्रवण का अभिनय विजेंद्र मुंडा, राजा दशरथ के किरदार में संदीप संभरवाल, गुरु वशिष्ठ के किरदार में राम भ्याना, कृष्ण भ्याना नंबरदार शांतनु, विजय कुमार सोभाग्यवती तो अशोक चावला मंत्री के किरदार में नजर आए जिन्होंने सबसे ज्यादा वाहवाही बटोरी। रामलीला के प्रसंग के अनुसार श्रवण कुमार अपने माता-पिता की आंखों की रोशनी लौटाने के लिए महाराजा दशरथ के दरबार में जाते हैं। वहां पर गुरु वशिष्ठ से उनकी आंखें ठीक होने का उपाय पूछते हैं। महाराजा वशिष्ठ श्रवण कुमार से कहते हैं कि यदि अपने माता-पिता को कावड़ में बैठाकर तीर्थों की यात्रा कराई जाए तो उनकी आंखें ठीक हो सकती हैं। यहाँ श्रवण कुमार, राजा दशरथ व गुरु वशिष्ठ के बीच जो संवाद होता है, वास्तव में काबिले तारिफ है। श्रवण कुमार अपने माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर लेकर निकल जाते हैं। वापसी में जब श्रवन कुमार अयोध्या के पास से गुजर रहे होते हैं तो माता-पिता को प्यास लगने पर पानी की तलाश में जंगल की ओर निकल जाते हैं। कुछ जंगली जानवरों के भ्रम में महाराजा दशरथ श्रवण कुमार को तीर मार देते हैं जिससे श्रवण कुमार की मौत हो जाती है। महाराजा दशरथ जब श्रवण के अंधे माता पिता के सामने जाते हैं और माता-पिता दशरथ को श्राप देते हैं। जिस प्रकार पुत्र वियोग में हम तड़प रहे हैं। उसी प्रकार से पुत्र वियोग में आप भी तड़पोगे। इससे पूर्व रामलीला की शुरूआत मुख्य अतिथि जिला पार्षद धर्मबीर गुराना ने रिबन काटकर की। रामलीला कलाकारों ने मुख्य अतिथि का जोरदार स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि गाँव लोहारी राघो में ऐतिहासिक रामलीला की शुरूआत वर्ष 1949 में हुई थी। गाँव की रामलीला की इस कदर धूम रही है कि हर साल इसे देखने के लिए अन्य प्रदेशों के श्रद्धालु भी पहुंचते हैं। इस अवसर पर श्री रामा कल्ब के प्रधान सेवक गुलशन भ्याना, मुनीष चराया,सुभाष चावला, इंद्रजीत तनेजा, पुष्कर भ्याना, राजकुमार सेठी, वेद प्रकाश चांदना, पूर्व सरपंच ओमप्रकाश, जयपाल, ईश्वर, डॉक्टर भूषण, रामप्रकाश उर्फ टीटी, कृष्ण कम्बोज, मास्टर सूबे सिंह, कृष्ण बडगुजर, रामगोपाल समेत गाँव के अनेक गणमान्यजन तथा भारी तादाद में श्रद्धालु मौजूद रहे।
लोहारी राघो रामलीला के श्रवण लीला मंचन को लाईव देखने के लिए नीचे दिए गुलाबी रंग लिंक पर क्लिक करें



फोटो : भ्याना डिजिटल स्टूडियो
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