- वर्ल्ड हैरिटेज राखीगढ़ी को सीधे हिसार से जोड़ने का सपना टूटा
- श्रेय लेने के चक्कर में राजनीति की भेंट चढ़ाया गया 6 गाँवों को हिसार से सीधे जोड़ने वाला अहम प्रोजेक्ट
- राखीगढ़ी, डाटा, मसूदपुर, गामड़ा, लोहारी राघो समेत दर्जनों गांवों के अरमानों पर पानी, किसानों में भारी आक्रोश
Hisar Jind Highway Link Route 4 canceld
संदीप कम्बोज
नारनौंद। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा 7 मई 2016 को घोषित हिसार-जींद हाईवे लिंक रूट-4 (वाया मसूदपुर-डाटा-लोहारी राघो-राखीगढ़ी) परियोजना आखिरकार 11 साल बाद राजनीति की भेंट चढ़ गई। (Rakhigarhi Highway Project Cancelled) अभी हाल ही में हरियाणा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय हड़प्पाकालीन विश्व धरोहर स्थल राखीगढ़ी को हिसार से सीधे जोड़ने का सपना अधूरा रह गया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इलाके के कुछ सफेदपोश नेताओं और उनके प्रभावशाली दलालों ने निजी राजनीतिक स्वार्थों के चलते इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डलवाया। बताया जा रहा है कि वे नहीं चाहते थे कि इस हाईवे का श्रेय किसी अन्य नेता या संगठन को मिले, क्योंकि इस परियोजना की पहली मांग सर्वजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर चावला ने उठाई थी। सरकार के इस फैसले से राखीगढ़ी, डाटा, मसूदपुर, गामड़ा, लोहारी राघो समेत दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीणों और किसानों के सपनों को गहरा झटका लगा है। क्षेत्र में भारी रोष है और आगामी विधानसभा चुनावों में सरकार को सबक सिखाने की तैयारी की चर्चा भी तेज हो गई है।
राजनीतिक साजिशों की भेंट चढ़ा विकास का सपना
हिसार-जींद हाईवे लिंक रूट-4 को क्षेत्रीय विकास की रीढ़ माना जा रहा था। (Rakhigarhi World Heritage Road) इस मार्ग के बनने से हिसार और जींद के बीच की दूरी करीब 20 किलोमीटर तक कम हो जाती और राखीगढ़ी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभरता। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, कुछ नेताओं ने अपने राजनीतिक हितों के चलते इस परियोजना को आगे बढ़ने से रोक दिया। किसानों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में देरी करती रही, ताकि परियोजना आगे न बढ़ सके।
नंद किशोर चावला ने सबसे पहले उठाई थी हाईवे की मांग
सर्वजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर चावला ने बताया कि उन्होंने 2 फरवरी 2015 को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर राखीगढ़ी को स्टेट हाईवे से जोड़ने की मांग उठाई थी। इसके बाद कई बार धरने-प्रदर्शन और आंदोलन किए गए। मुख्यमंत्री ने 7 मई 2016 को नारनौंद रैली में इस सड़क परियोजना को मंजूरी दी थी। 21 जनवरी 2019 को 100 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया गया, जो दो किश्तों में जारी हुआ। सरकार 5 साल में 60 एकड़ जमीन भी अधिग्रहित नहीं कर सकी। सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए चावला ने कहा कि सर्वे का काम पूरा हो चुका था और किसानों ने कलेक्टर रेट पर भूमि देने की सहमति भी दे दी थी। किसानों का डेटा पोर्टल पर अपलोड हो चुका था और मुआवजा वितरण ही बाकी था। इसके बावजूद पांच साल में मात्र 60 एकड़ जमीन अधिग्रहण नहीं हो पाई, जो सरकार की इच्छाशक्ति पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
Hisar to Jind direct road via Rakhigarhi
राखीगढ़ी को मिलता सीधा एयरपोर्ट कनेक्शन
हिसार-जींद हाईवे बनने से राखीगढ़ी को हिसार एयरपोर्ट और जींद से सीधा सड़क संपर्क मिल जाता। यहां सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से बना संग्रहालय और पर्यटन परियोजनाएं और अधिक पर्यटकों को आकर्षित करतीं।
जमीन की कीमतें और रोजगार दोनों बढ़ते
विशेषज्ञों का मानना है कि इस हाईवे के बनने से इलाके की जमीन की कीमतों में कई गुना उछाल आता और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होते। होटल, ढाबे, ट्रांसपोर्ट और पर्यटन आधारित व्यवसायों में बड़ा विस्तार होता।
किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर
क्षेत्र के किसानों ने 20 दिसंबर 2025 को लोहारी राघो अनाज मंडी में विशाल धरना भी दिया था। धरने में राखीगढ़ी, गामड़ा, डाटा, मसूदपुर समेत कई गांवों से हजारों किसान पहुंचे थे। किसानों का कहना है कि सरकार ने उन्हें केवल आश्वासन दिए, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ।
परियोजना पर एक नजर
परियोजना नाम: हिसार-जींद लिंक हाईवे रूट-4
मार्ग : मसूदपुर,डाटा,लोहारी राघो, राखीगढ़ी
घोषणा: 7 मई 2016
बजट स्वीकृति: 21 जनवरी 2019
अनुमानित लागत: 100 करोड़ रुपये
दूरी में कमी: लगभग 20 किमी
स्थिति: 14 जनवरी 2026 में रद्द
ये है हाईवे परियोजना की टाइमलाइन
2015: नंद किशोर चावला ने मांग उठाई
2016: मुख्यमंत्री ने घोषणा की
2019: 100 करोड़ का बजट मंजूर
2021: दूसरी किश्त जारी
2026: सरकार ने प्रोजेक्ट रद्द किया
हाईवे बनने से होने वाले फायदे
हिसार-जींद दूरी 20 किमी कम
राखीगढ़ी को सीधा एयरपोर्ट कनेक्शन
पर्यटन में भारी बढ़ोतरी
जमीन की कीमतों में उछाल
हजारों रोजगार अवसर
अब ये हैं ग्रामीणों की मुख्य मांगें
परियोजना को तुरंत बहाल किया जाए
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की जाए
मुआवजा तुरंत वितरित किया जाए
हाईवे निर्माण का स्पष्ट रोडमैप जारी किया जाए
प्रोजेक्ट को बहाल कर काम शुरु हो, वरना दिए जाएंगे धरने
सर्वजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद किशोर चावला ने इस प्रोजेक्ट को लेकर सीधे इलाके के नेताओं पर राजनीति के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सरकार को चेताया है कि सरकार इस प्रोजेक्ट का काम जल्दी से शुुरु कर दे नहीं तो वे हिसार,मिर्जापुर, खरकड़ी,चैनत, मसूदपुर,लोहारी राघो, राखीगढ़ी, मिलकपुर और गुलकनी में धरने प्रदर्शन शुरु करेंगे। उन्होंने कहा कि वे इस प्रोजेक्ट को पूरा करवा कर ही दम लेंगे।
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