- फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद जांच के चलते लंबे समय तक बंद रहा था मनरेगा का काम
- ग्रामीणों ने उठाए सवाल, बोले लोहारी का सत्यानाश कर डाला खुदगर्जी राजनीत, इलाके के नेताओें और उनके करीबियों ने
संदीप कम्बोज। www.lohariragho.in
हिसार। गाँव लोहारी राघो में आई प्रचंड बाढ़ ने अब रौद्र रुप दिखाना शुरु कर दिया है। 72 घंटे बाद भी गाँव से पानी नहीं निकल पाया है। गाँव के भीतर और चारों तरफ अब भी पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। बरसाती पानी से गाँव के दर्जनभर घर धंस गए हैं, कई घरों में दरारें आ चुकी हैं, दीवारें ढह गई हैं। कई घरों में अब भी दो-दो फीट तक जलभराव है। पानी निकालने के मद्देनजर प्रशासन द्वारा किए सब इंतजाम छोटे पड़ते नजर आ रहे हैं क्योंकि बाढ़ का पानी इतना ज्यादा है कि 4-5 मोटरों से भला क्या होने वाला है। ग्रामीणों में अब खुसर-फुसर शुरु हो चुकी है कि इस प्रचंड बाढ़ की वजह मनरेगा घोटाला भी है। ग्रामीणों की मानें तो मनरेगा घोटाले की वजह से ही यह बाढ़ जैसे हालात उपजे हैं।
जानें क्या है लोहारी राघो मनरेगा घोटाला और कैसे इस बाढ़ से जुड़े हैं तार
मनरेगा घोटाला उजागर होने के बाद वर्ष 2019 में तत्कालीन जिला उपायुक्त ने सरपंच चंद्रकांता चांदना व ग्राम सचिव को सस्पेंड कर दिया था। मनरेगा घोटाले का खामियाजा मनरेगा के असली मजदूरों को भी भुगतना पड़ा। क्योंकि प्रशासनिक जांच के चलते लंबे समय तक गाँव में मनरेगा के कार्यों पर ब्रेक लगा रहा जिसके चलते गाँव के जोहड़ों व ड्रेनों की समय पर खुदाई नहीं हो पाई। मनरेगा के असली मजदूरों को करीब डेढ़ साल तक काम नहीं मिला जबकि दर्जनों फर्जी मजदूर बिना काम किए घर बैठे हाजिरी लगाकर लाखों के वारे न्यारे कर चुके थे। मनरेगा घोटाले को दबाने में भी जिले के नेताओं का अहम रोल रहा जिन्होंने प्रशासन पर दबाव बनाकर भ्रष्टाचार के इतने बड़े मामले को रफा-दफा कर डाला। यहाँ भी सारी कमी नेताओं के वर्करोंं की ही रही है। क्योंकि क्या नेताओं के वर्कर सच नहीं जान रहे थे। सभी नेताओं के एक-एक वर्कर को पता था कि लोहारी राघो के मनरेगा में घोटाला किया गया है। लेकिन वे अपने चहेते नेताओं को घोटालेबाजों का साथ देने से नहीं रोक पाए। नतीजन भ्रष्टाचार करने वाले दूध के धुले हो गए। इसमें सारा नुकसान हुआ तो मनरेगा के असली मजदूरों व गाँव लोहारी का। मनरेगा घोटाले की वजह से मजदूरों को लगभग दो साल तक काम नहीं मिल पाया जिससे उन्हेंं परेशानियोंं का सामना करना पड़ा। यदि मनरेगा का काम सुचारु रुप से चलता रहता तो अब तक गाँव के जोहड़ों व ड्रेनों की खुदाई हो चुकी होती और आज लोहारी राघो जो समंदर की मानिंद दिखाई दे रहा है, ऐसा बिल्कुल न होता। न लोगोें के घर जमींदोंज होते न किसी का आर्थिक नुकसान होता। ग्रामीणों की मानें तो कुल मिलाकर इसके लिए मनरेगा के घोटालेबाज और उन्हें संरक्षण देने वाले नेता और उनके वर्कर भी जिम्मेदार हैं।
मनरेगा घोटालेबाजों को संरक्षण देने वाले नेताओं के वर्कर बताएं कहाँ बेच डाला अपना जमीर
गाँव के कुछ ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर लोहारी में मौजूद नेताओं के वर्करों से सवाल किया है कि उन्होंने मनरेगा घोटाले में अपने नेताओं को आइना क्यों नहीं दिखाया? क्यों सच को सच और झूठ को झूठ नहीं कहा गया? डंके की चोट पर क्यों नहीं कहा गया कि मनरेगा घोटालेबाजों ने लोहारी राघो के गरीब मजदूरों का हक लूटा है, ऐसे लोगों को सजा दिया जाना जरुरी है। यदि उनके कहने पर भी उनके प्रिय नेताओं ने मनरेगा मजदूरों का हक डकारने वालों का साथ दिया तो ऐसे वर्करों को नैतिक आधार पर उन नेताओं का साथ छोड़ देना चाहिए या नहीं, यदि उनके भीतर कुछ जमीर जिंदा है तो और वे वास्तव में लोहारी का कुछ भला चाहते हैं। क्योंकि जो आदमी सही-गलत मेें फर्क नही कर सकता और सारी हकीकत पता होने के बावजूद भ्रष्टाचार के मामले को दबा रहा है तो वो कैसा जनप्रतिनिधि है? ऐसे जनप्रतिनिधियोें की नियत पर सवालिया निशान खड़े होते हैं? क्या किसी जनप्रतिनिधि द्वारा भ्रष्टाचार के मामले को दबाना उचित है? या तो वे नकार दें कि लोहारी में कोई मनरेगा घोटाला हुआ ही नहीं ? किसी भी रसूखदार ने गरीब मजदूरों का हक नहीं डकारा। यहाँ मनरेगा घोटालेबाजों को संरक्षण देने वाले नेताआें से ज्यादा गलत उनके वर्कर हैं जो उन्हें असल सत्य से अवगत नहीं करवा पाए। मनरेगा के लुटेरों को संरक्षण देने वाले नेताओं के वर्करों का जरा सा भी जमीर है और वे लोहारी गाँव का वास्तव में हित चाहते हैं तो क्या उन्हें ऐसे नेताओं का साथ छोड़ नहीं देना चाहिए जो गाँव के भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रहे थे। लोहारी राघो की जनता आपसे पूछ रही है, जवाब दीजिए, यदि आपका जमीर है तो ।
कब होगी मनरेगा घोटाले की रिकवरी, पूछता है लोहारी राघो
ग्रामीणों ने आरोप लगााया है कि इसी मनरेगा घोटाले की रिकवरी आज तक भी नहीं हो पाई है। उन्होंने नेताओं के वर्करों से सवाल किया है कि क्या उनके प्रिय नेता मनरेगा घोटाले की रिकवरी करवाने को तैयार हैं? या वे लोग ईमानदार खट्टर सरकार के ईमान पर पलीता लगा रहे हैं। ग्रामीणोें का कहना है कि क्या मनरेगा घोटाले की रिकवरी कभी होगी या नहीं? उन्होेंने इसकी उम्मीद छोड़ दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकार से जुड़े नेता खुद भ्रष्टाचार को संरक्षण देते हों, ऐसे में इंसाफ की उम्मीद भला किससे की जा सकती है। कुल मिलाकर ग्रामीणों की नजर में इस बाढ़ के जिम्मेदार हैं मनरेगा के घोटालेबाज जिनकी वजह से मनरेगा का काम रुका और गाँव के जोहड़ोंं व ड्रेनों की समय पर खुदाई नहीं हो पाई।
History of Lohari Ragho : पहली बार पढ़ें पहली मानव सभ्यता के अवशेषों पर आबाद हड़प्पाकालीन ऐतिहासिक गाँव लोहारी राघो का संपूर्ण इतिहास
इनसे मिलिए ये हैं लोहारी राघो के ‘मिथुन’, सोशल मीडिया पर धूम मचा रहे इस स्टार गायक के वीडियो
कभी दिल्ली तक मशहूर थी लोहारी राघो की रामलीला, पढ़ें लोहारी राघो रामलीला की रोचक व अनसुनी कहानी
दशहरा स्पेशल : यही हैं लोहारी राघो रामलीला के असली ‘रावण’ जिनकी एक गर्जना से गूंज उठता था पंडाल
https://lohariraghonews.blogspot.com/
लोहारी राघो के यू-ट्यूब चैनल को ज्यादा से ज्यादा सब्सक्राईब करें
https://www.youtube.com/channel/UChspBOwRmHW4ZGL3Px0rBeg
लोहारी राघो के फेसबुक ग्रुप को ज्वाईन करें
https://www.facebook.com/groups/lohariragho
लोहारी राघो को इंस्टाग्राम पर फोलो करें
https://www.instagram.com/lohariragho/
लोहारी राघो को ट्वीटर पर फोलो करें
https://twitter.com/LohariRagho
लोहारी राघो को pinterest पर फोलो करें
https://in.pinterest.com/lohariragho/_saved/
लोहारी राघो के whatsapp ग्रुप में जुड़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें
