- जानें सरपंच पद के लिए अब तक कौन-कौन हैं मैदान में और कौन है सबसे दमदार चेहरा ?
संदीप कम्बोज
लोहारी राघो। ग्राम पंचायत लोहारी राघो की सरकार का मुखिया इस बार पिछड़ा वर्ग-ए(बीसी-ए) से होगा। पिछले 70 साल के इतिहास में गाँव लोहारी राघो के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब गाँव की सरपंची की कमान बीसी-ए के सरपंच के हाथ होगी। हरियाणा सरकार द्वारा पंचायतों में आरक्षण लागू किए जाने के बाद गाँव लोहारी राघो में इस बार बीसी-ए के कई उम्मीदवार मैदान में हैं। जिला हिसार में पंचायत चुनाव का बिगुल बजने में अभी देर है लेकिन सभी उम्मीदवारों ने अपने-अपने स्तर पर चुनाव प्रचार जोर-शोर से शुरु कर दिया है। चुनाव-ए-जंग में अब तक कूदने वाले उम्मीदवारों में मुख्यत: रमेश कम्बोज नंबरदार, सोनू सरोहा, मंगल जांगड़ा, मक्खन जांगड़ा, लछमण कलंदरी, पूर्ण कम्बोज, सूरज कम्बोज पुत्र हंसराज कम्बोज, कृष्ण कम्बोज पुत्र राम कम्बोज, भजन कम्बोज पुत्र बाग राम कम्बोज तथा देसराज कम्बोज पुत्र रज्जा राम कम्बोज, राकेश कम्बोज पुत्र टेकचंद कम्बोज समेत कई नए चेहरों का नाम चर्चा में है। सोनू सरोहा अब तक नाई बिरादरी के इकलौते उम्मीदवार हैं जबकि कम्बोज बिरादरी से छह से सात चेहरे चुनाव-ए जंग में उतरने की तैयारी में हैं। इसके अलावा जांगड़ा समाज से भी चार उम्मीदवारों का नाम चर्चा में है। वहीं भड़बुजा समाज से इकलौते उम्मीदवार लछमन कलंदरी ने चुनावी जंग में उतरकर विरोधियों को ललकारा है। अब तक के समीकरणों की बात करें तो किसी भी उम्मीदवार का पलड़ा भारी नहीं दिखाई दे रहा है क्योंकि अभी तक यह पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है कि कौन-कौन उम्मीदवार मैदान में डटने वाले हैं। जिन उम्मीदवारों के नाम अभी तक चर्चाओं में हैं उनमें से सभी उम्मीदवार मैदान में टिकेंगे या नहीं, यह अभी वक्त बताएगा। लेकिन अब तक के समीकरण यह बता देने के लिए काफी हैं कि इस बार लोहारी राघो की सरपंची उम्मीदवारों के लिए नाक का सवाल बनी है। कम्बोज समाज में 6 से 7 उम्मीदवारों के चुनावी जंग में ताल ठोंकने से समीकरण पूरी तरह से बिगड़ सकते हैं। क्योंकि यदि कम्बोज समाज इसी तरह से कई धड़ों में बंटा रहा तो सरपंची उनके हाथ से निकल सकती है। कम्बोज समाज के एकजुट न होने की सबसे बड़ी वजह परिवारवाद है। क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ है कि कम्बोज समाज के लोग जागरुक हुए हैं और परिवारवादी सोच रखने वालों के गाल पर करारा तमाचा आन जड़ा है। कम्बोज समाज के लोगों का कहना है कि समाज में परिवारवाद हावी है। समाज में कुछ परिवार ऐसे हैं जो पिछले 25-30 साल से हर पंचायत चुनाव में समाज की तरफ से उम्मीदवार बनकर चुनाव लड़ते आ रहे हैं। इनमें मुख्यत: दो ही परिवार हैं और ये दोनों परिवार भी आपस में एक ही हैं यानि कि आपस में रिश्तेदार। कम्बोज समाज के लोगों की मानें तो हर बार के पंचायत चुनाव में इन्ही दो परिवारों से ही उम्मीदवार होते हैं। चाहे सरपंच पद का चुनाव हो, या ब्लॉक समिति का या फिर जिला पार्षद का। हर पद के लिए यह दो परिवार ही आगे रहते हैं। आरोप है कि ये दो परिवार समाज के अन्य लोगों को आगे आने का मौका बिल्कुल नहीं देना चाहते। परिवारवादी सोच रखने वाले इन दोनों परिवारों की सोच बस अपने ही परिवार तक सीमित हो चुकी है। ये बिल्कुल नहीं चाहते कि कम्बोज समाज में किसी अन्य परिवार से सरपंच, ब्लॉक समिति सदस्य या जिला पार्षद आदि बनें। इतिहास गवाह है कि इन दोनों परिवारों के उम्मीदवारों ने हर पंचायत चुनाव में भागीदारी की है और चुनाव जीतकर चयनित भी हुए हैं। हालांकि जिला पार्षद, सरपंच और ब्लॉक समिति पद का चुनाव हार भी चुके हैं। पिछले पंचायत चुनाव में भी कम्बोज समाज ने इन्हीं के परिवार से ब्लॉक समिति सदस्य और पंच को चुना था। इसके अलावा पूर्व के पंचायत चुनावों में जब भी सरपंच पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होता है तो हर बार कम्बोज समाज से जो दावेदारी कर रहे होते हैं, इन्हीं दो परिवारों से होते हैं लेकिन अफसोस इस बात का है कि चयनित होने के बावजूद ये आज तक भी कम्बोज समाज के लिए कुछ नहीं कर पाए। गाँव में हर समाज की अपनी-अपनी धर्मशालाएं हैं। पंचायत में भागीदारी करने वाला हर कोई पंच, सरपंच व नंबरदार अपने समाज से संबंधित किसी संत, महात्मा के नाम पर ट्रस्ट आदि बना लाभ उठा रहा है तो किसी पंच ने अपनी जाति के नाम पर बनवा ली हैं धर्मशालाएं। लेकिन अपने आप को कम्बोज समाज का ठेकेदार कहने वाले ये परिवार ग्राम पंचायत में भागीदारी करते हुए आज तक भी कम्बोज समाज के लिए एक भी सांझा बड़ा काम नहीं करवा पाए। इन्हीं कुछ बातों के जवाब कम्बोज समाज के लोग अपनी जाति के इन ठेकेदार परिवारों से मांग रहे हैं जिस पर वाद-प्रतिवाद व मंथन अभी जारी है। परिवारवाद समेत कई मुद्दों को लेकर कम्बोज समाज के कुछ लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है जिसकी वजह से एकजुटता बनती नहीं दिखाई दे रही। कुल मिलाकर अभी तक के समीकरणों के मुताबिक हवा का रुख बता पाना बड़ा कठिन है। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि कौन चेहरा सबसे ज्यादा दमदार है?
जानें लोहारी राघो के अब तक के सरपंचों के बारे में (1952-2022)
1952-55 सुधन सैनी
1955-58 रत्तन लाल चावला
1958-61 रत्तन लाल चावला
1961-64 रत्तन लाल चावला
1964-69 रत्तन लाल चावला
1969-74 महेश भ्याना
1974-79 महेश भ्याना
1979-84 महेश भ्याना
1984-89 लाजपत भ्याना
1989-1990 प्यारेलाल चावला
1990-1994 विनोद भ्याना
1994-1999 अजीत सिंह
1999-2006 ध्यान सिंह
2006-2011 सुदेश सैनी
2011-2016 ओमप्रकाश वाल्मीकि
2016-2022 चंद्रकांता चांदना
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