- रमेश कम्बोज नम्बरदार के घर खूब मनाया गया जश्न, बजे ढ़ोल नगाड़े, पटाखे
- चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद सबसे पहले रमेश कम्बोज से आशीर्वाद लेने पहुंचे नवनियुक्त सरपंच सोनू सरोहा
संदीप कम्बोज
लोहारी राघो। यह बात पूरी तरह से सच है कि राजनीति चालाक लोगों का खेल है लेकिन राजनीति में अगर थोड़ी सी भी चूक हो जाए तो बड़े से बड़े महारथी भी गच्चा खाकर चारों खाने चित हो जाते हैं और अगर इसमें थोड़ी सूझ-बूझ से काम लिया जाए तो बड़ी से बड़ी जंग को भी फतेह कर लिया जाता है। (Ramesh-Kamboj-Nambardar-turned-out-to-be-a-staunch-player-of-Lohari-Ragho-politics) कुछ ऐसा ही करिश्मा कर दिखाया है लोहारी राघो पंचायत चुनाव महासंग्राम का पूरा का पूरा पासा पलटने वाले सबसे अहम उम्मीदवार रमेश कम्बोज नम्बरदार ने। लोहारी राघो सरपंच चुनाव की जंग में 49 वोट हासिल कर पराजय का सामना करने के उपरांत भी रमेश कम्बोज नम्बरदार इस जंग को जीत गए हैं। इस बार के पंचायत चुनाव में लोहारी राघो की राजनीति में उथल-पुथल मचाने वाले यही इकलौते उम्मीदवार हैं जिन्होंने ऐसा करिश्मा कर दिखाया है कि अपने आप को राजनीति का धुरंधर समझने वालों की भी अकल ठिकाने लग चुकी है। रमेश कम्बोज नम्बरदार ने अपनी सच्चाई, ईमानदारी व अटल इरादों के जादूई तिलिस्म से पूरी तरह से आभास करवा दिया है कि कोई अपने आप को राजनीति का शहंशाह समझने की भूल कदापि न करें। आप शेर हैं तो क्या हुआ कोई सवाशेर भी बैठा हो सकता हैै। रमेश कम्बोज नंबरदार को इस बार के चुनाव का सबसे अहम किरदार कहा जाए तो कोई अतिशेक्ति नहीं होगी।
पूरे चुनाव के दौरान प्रारंभ से लेकर अंत तक रमेश कम्बोज अपने इरादे पर पूरी तरह से अटल रहे। चुनाव में रमेश कम्बोज पर दूसरे उम्मीदवारों को समर्थन देने के लाख दबाव डाले गए। चुनाव से पीछे हटने के बदले में लाखों रुपए के प्रलोभन को भी उन्होंने लात मारकर ठुकरा डाला और दिखा दिया कि इंसान के पास अपने जमीर से बढ़कर कुछ नहीं होता। भले ही दूसरे उम्मीदवारों ने चंद रुपयों की खातिर अपने जमीर को बेचकर ईमान का सौदा कर लिया हो लेकिन रमेश कम्बोज सच्चाई व ईमानदारी की डगर पर चुनावी जंग के अंतिम क्षणों तक कायम रहे। दूसरे उम्मीदवार व उनके समर्थकों द्वारा बिछाया गया खरीद-फरोख्त का जाल भी उन्हें फांस नहीं पाया और उन्हें मुंह की खानी पड़ी। अब यदि रमेश कम्बोज नम्बरदार दूसरे उम्मीदवार द्वारा बिछाए गए लालच के जाल में फंस जाते तो आज इस चुनाव का परिणाम कुछ ओर होता। विजय घोष सोनू सरोहा के घर नहीं कहीं और सुनाई दे रहे होते। इस बात को पूरा गाँव अच्छी तरह से समझ चुका है। रमेश कम्बोज नम्बरदार के हौंसले को सलाम जिन्होंने सच्चाई व ईमानदारी का साथ देकर एक सच्चे ग्रामीण होने का फर्ज अदा किया। भविष्य में जब भी लोहारी राघो पंचायत चुनाव की चर्चा होगी तो रमेश कम्बोज नम्बरदार के नाम का जिक्र अवश्य होगा क्योंकि ऐसे ठोस व अटल इरादों वाले उम्मीदवार आजकल ढूंढ़ने से भी कहीं नहीं मिलेंगे जिनके जमीर को कोई खरीद सके। लोहारी राघो के विकास के सफर में उनके इस अमूल्य सहयोग को हमेशा याद किया जाता रहेगा क्योंकि अपने स्वाभिमान के अलावा इंसान के पास और कोई बड़ी पूंजी नहीं होती। आज रमेश कम्बोज नम्बरदार वास्तव में स्वाभिमान की जीती जागती मिसाल हैं। और यह मिसाल भविष्य में आने वाले पंचायत चुनावों में भी हर बार दी जाएगी कि लोहारी राघो में कोई महारथी था जिसने सच्चाई के रथ पर सवार होने के लिए गलत मंसूबों वालों के लाख प्रलोभनों को ठोकर मार दी थी।
जानें कौन हैं यह रमेश कम्बोज नम्बरदार और क्या है उनका राजनीतिक अनुभव
मूल रुप से गाँव लोहारी राघो निवासी गहला राम कम्बोज के घर वर्ष 1958 में जन्मे रमेश कम्बोज नम्बरदार आठ भाई-बहनों में पाचवें पर हैं। वर्ष 1976 में 10+2 परीक्षा उतीर्ण करने के उपरांत खेती के साथ-साथ अपना बिजनेस भी शुरु किया। वर्ष 1996 में गाँव लोहारी राघो के नम्बरदार चुने गए तथा पिछले 26 सालों से गाँव लोहारी राघो की जी जान से सेवा करते आ रहे हैं। रमेश कम्बोज नम्बरदार कोई राजनेता नहीं है। 64 साल की उम्र में यह पहली बार है जब उन्होंने कोई चुनाव लड़ा है। हालांकि रमेश कम्बोज नम्बरदार की मानें तो उनकी चुनाव लड़ने की कोई मंशा नहीं थी। गाँव के ही कुछ साथी नंबरदारों ने उन्हें बार-बार सरपंच पद का चुनाव लड़ने के लिए कहा तो वे उनकी बात मानने को तैयार हो गए। उनके कहने पर ही सरपंच पद का नामांकन दाखिल किया लेकिन चुनाव करीब आते ही नामांकन फार्म भरवाने वाले लोग उनसे किनारा कर गए। चुनाव से पूर्व रात उनहें सैकड़ों बार फोन करके दूसरे उम्मीदवार को समर्थन देने के लिए दबाव डाला गया। प्रलोभन तक दिए गए लेकिन वे अपने इरादों पर अटल रहे। यह रमेश कम्बोज की राजनीतिक सूझ-बूझ का ही परिणाम है जो इस चुनाव का पासा पूरी तरह से पलट गया है।
![]() |
| लोहारी राघो। रमेश कम्बोज नम्बरदार के परिवार के साथ नवनिर्वाचित सरपंच सोनू सरोहा। |
जीत के बाद चुनाव मैदान से सीधे रमेश नंबरदार के घर आशीर्वाद लेने पहुंचे नवनिर्वाचित सरपंच सोनू सरोहा
शुक्रवार शाम सरकारी स्कूल में जैसे ही चुनाव नतीजों की घोषणा हुई और सोनू सरोहा की जीत का ऐलान हुआ तो समर्थकों द्वारा जमकर जश्न मनाया गया। खूब पटाखे फोड़े गए, आतिशबाजी हुई। रमेश कम्बोज नंबरदार के घर भी जश्न का माहौल था। यहां भी लड्डू बांटे जा रहे थे और आसमां पटाखों से गूंज रहा था। ग्रामीण यह देखकर हैरान थे कि एक हारे हुए उम्मीदवार के घर आखिर पटाखे क्यों फूट रहे हैं लेकिन यह जश्न सत्य की जीत का था। सोनू सरोहा जीत के बाद अपने हजारों समर्थकों के साथ सीधे सबसे पहले रमेश कम्बोज नम्बरदार के घर पहुंचे तथा आशीर्वाद लिया। देर रात तक यह जीत का जश्न चलता रहा।
आज प्रात: भी सबसे पहले सैकड़ों समर्थकों संग रमेश नंबरदार के घर पहुंचे सोनू, रमेश ने अपने समर्थकों संग किया जोरदार स्वागत
नवनिर्वाचित सरपंच सोनू सरोहा ने जीत के बाद आज सुबह धन्यवादी दौरे की शुरूआत की। इस दौरान सरपंच सोनू सरोहा अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ सबसे पहले नंबरदार रमेश कम्बोज के घर पहुंचे। इस दौरान रमेश कम्बोज नम्बरदार ने अपने समर्थकों सहित सरपंच सोनू सरोहा का जोरदार स्वागत किया तथा उन्हें गाँव के विकास के लिए हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया। इस अवसर पर सरपंच सोनू सरोहा ने भी ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि इस चुनाव में सच्चाई, ईमानदारी, भाईचारे व पूरे गाँव की जीत हुई है। उन्होंने ग्रामीणों को विश्वास दिलाया कि वे गाँव की सेवा में पूरी ताकत झोंक देंगे और लोहारी राघो को देश के नक्शे पर चमकाएंगे। इस दौरान रमेश नंबरदार ने सोनू सरोहा को 11 हजार रुपए की माला पहनाकर उनहें अपना आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर हरीकृष्ण कम्बोज, सुभाष चराया उर्फ सीटी, राहुल कम्बोज, हिमांशु चराया, सतनाम कम्बोज, आत्म कम्बोज, राजकुमार भट्टी, डॉकटर अजमेर, नंबरदार मांगेराम समेत सैकड़ों समर्थक व ग्रामीण मौजूद रहे।
History of Lohari Ragho : पहली बार पढ़ें पहली मानव सभ्यता के अवशेषों पर आबाद हड़प्पाकालीन ऐतिहासिक गाँव लोहारी राघो का संपूर्ण इतिहास
जानें किसके नाम पर हुआ ऐतिहासिक गाँव ‘लोहारी राघो’ का नामकरण, पढ़ें दिलचस्प कहानी
इनसे मिलिए ये हैं लोहारी राघो के ‘मिथुन’, सोशल मीडिया पर धूम मचा रहे इस स्टार गायक के वीडियो
कभी दिल्ली तक मशहूर थी लोहारी राघो की रामलीला, पढ़ें लोहारी राघो रामलीला की रोचक व अनसुनी कहानी
दशहरा स्पेशल : यही हैं लोहारी राघो रामलीला के असली ‘रावण’ जिनकी एक गर्जना से गूंज उठता था पंडाल
https://lohariraghonews.blogspot.com/
लोहारी राघो के यू-ट्यूब चैनल को ज्यादा से ज्यादा सब्सक्राईब करें
https://www.youtube.com/channel/UChspBOwRmHW4ZGL3Px0rBeg
लोहारी राघो के फेसबुक ग्रुप को ज्वाईन करें
https://www.facebook.com/groups/lohariragho
लोहारी राघो को इंस्टाग्राम पर फोलो करें
https://www.instagram.com/lohariragho/
लोहारी राघो को ट्वीटर पर फोलो करें
https://twitter.com/LohariRagho
लोहारी राघो को pinterest पर फोलो करें
https://in.pinterest.com/lohariragho/_saved/
लोहारी राघो के whatsapp ग्रुप में जुड़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें



